गर्मी बढ़ने की वजह से बिजली की खपत भी बढ़ गयी है। 15 दिन से अधिकतम तापमान 35 डिग्री से कम नहीं हुआ है। बीच-बीच में हुई बारिश ने थोड़ी राहत जरूर दिलाई है, मगर वह कुछ घंटों के लिए ही रही है। गर्मी अधिक होने की वजह से लोगों का बुरा हाल है। गर्मी बढ़ने की वजह से बिजली खपत भी 34 प्रतिशत अधिक तक पहुंच गई है। गर्मी से बचने के लिए लोगों ने इस बार एसी और कूलर खरीदने को प्राथमिकता दी है। इससे बिजली की मांग बढ़ने से लाइन भी ट्रिप होने लगी है। इसके चलते बिजली निगम कार्यालय में हर रोज 100 से अधिक शिकायतें आ रही हैं। वहीं गर्मी के मौसम के अलावा बारिश में भी बिजली निगम के कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। एक शिकायत पर कम से कम आधा घंटा लगता है। गर्मी से राहत पाने के लिए बाजार में कूलर और एसी की जमकर बिक्री हो रही है। शहर में अब तक 200 से अधिक नए एसी और 800 से अधिक कूलर बिक चुके हैं। वहीं घरों में लगातार चल रहे कूलर और एसी से बिजली लाइन पर 34 प्रतिशत तक लोड बढ़ गया है, जिससे बार-बार केबल जल रही है। परिणामस्वरूप शहर में बिजली संकट पैदा हो रहा है। एक महीने में औसतन दो हजार से अधिक शिकायतें बिजली निगम कार्यालय में उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज करवाई जाती हैं।
24 घंटे में 90 से 100 बार जाती है बिजली
शहर में बिजली संकट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिजली निगम कार्यालय में प्रतिदिन 24 घंटे में 90 से 100 शिकायतें पहुंच रही हैं। जबकि बिजली निगम के कर्मचारी 70 से 75 प्रतिशत शिकायतों का ही निराकरण कर पा रहे हैं। 25 प्रतिशत उपभोक्ताओं को फाल्ट की शिकायत करने के बाद उसके ठीक होने के इंतजार में गर्मी में उबलते रहते हैं।
1500 एंपीयर पहुंचा लोड
आमतौर पर बिजली की लाइन पर लोड 1000 एम्पीयर रहता है, लेकिन गर्मी बढ़ते ही कूलरोें और पंखों के चालू होने से लोड 1500 एंपीयर के ऊपर पहुंचने लगी है। इससे केबल गर्म होकर जल रही है। आलम यह है कि बिजली निगम के कर्मचारी एक बार केबल जोड़कर जाता है और बाद में उसी स्थान पर फिर से केबल जलकर फाल्ट हो जाता है।
गर्मी में लोगों द्वारा पंखे और एसी ज्यादा चलाए जाते हैं। इस कारण गर्मी के मौसम में लोड ज्यादा बढ़ जात है। वहीं गर्मी ज्यादा होने के कारण केबल भी बार-बार जल जाती हैं। इस कारण उपभोक्ताओं को गर्मी के मौसम में ज्यादा परेशानी होती है। उपभोक्ताओं की समस्या को प्राथमिकता से हल किया जाता है। जिस भी क्षेत्र से फोन आता है, कर्मचारियों को भेजकर फाल्ट ठीक करवा दिया जाता है। -श्यामबीर सैनी, एसई बिजली निगम जींद।