जींद। जिले में जिला राजस्व विभाग ने खरीफ ई-गिरदावरी का काम 50 प्रतिशत पूरा कर लिया है जो पूरा होने के बाद डाटा तैयार कर मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। यह दर्ज होने के बाद ही किसान फसल बेच सकेंगे। यह काम पांच सितंबर तक पूरा करना है।
जिले में 305 गांव हैं और 90 पटवारी कार्यरत हैं। इनमें से लगभग 80 पटवारियों की ई-गिरदावरी में ड्यूटी लगाई है। पटवारी खेतों में जाकर फसलों की जांच कर रहे हैं कि किसानों ने जो फसल खेतों में उगाई है वहीं मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपलोड की है या नहीं। जांच के बाद फसलों का डाटा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
ई-गिरदावरी से काम में पारदर्शिता भी आ रही है। किसानों को इसका फायदा यह होगा कि उन्हें फसल बेचते समय डाटा मिसमैच से नहीं गुजरना पड़ेगा। जिले में अप्रैल-मई में खरीफ की फसल की बुआई होती है। इनकी कटाई अक्तूबर से लेकर नवंबर तक होती है। इस मौसम में नरमा, धान, ज्वार, बाजरा, मूंग, ग्वार, तिल मुख्य फसल मानी जाती है। इसमें बाजरा फसल की 20 दिन बाद कटाई शुरू हो जाएगी। वहीं कपास की भी अक्तूबर में चुगाई का काम शुरू हो जाएगा।
फसल बेचने में नहीं आएगी अड़चन
ई-गिरदावरी होने से किसानों को अनाज मंडी में फसल बेचने की समस्या नहीं आएगी। हालांकि ई-गिदरावरी के बाद सुनिश्चित हो जाएगी कि किस एकड़ में कौनसी फसल उगाई हुई है। कई बार किसान मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फसलों की जानकारी गलत अपलोड करवा देते हैं। ऐसे में जब पटवारी ई-गिरदावरी करते हैं तो फसलों का आंकड़ा मिसमैच हो जाता है।
इस साल रकबे का ब्योरा
फसल
क्षेत्र
धान
3.95 लाख एकड़
कपास (नरमा)
30 हजार एकड़
बाजरा
14 हजार एकड़
ज्वार
11 हजार एकड़
वर्जन
ई-गिरदावरी का कार्य टैब से किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता भी आ रही है। किसानों को फायदा होगा कि उन्हें फसल बेचते समय डाटा मिसमैच से नहीं गुजरना पड़ेगा।
राजेश गौतम, जूनियर प्रोग्रामर, तहसील जींद
वर्जन
ई-गिरदावरी का कार्य जिले के सभी 305 गांव में होना है। यह कार्य पांच सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। कार्य पूरा होने के बाद पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
राजकुमार, जिला राजस्व अधिकारी, जींद