जीत के बाद उचाना कलां क्षेत्र में कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे दुष्यंत चौटाला।
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प्रदेश की हॉट सीट उचाना कलां पर सभी की नजर टिकी हुई थी। यहां से परिणाम भी चौंकाने वाले आए हैं। दुष्यंत चौटाला व जेजेपी के नेताओं ने उचाना कलां में पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन यहां मुकाबला बीरेंद्र सिंह परिवार से था, जो उचाना की राजनीति में 45 साल से डटा हुआ है। दुष्यंत चौटाला ने चुनौती को स्वीकार करते हुए यहां पर योद्धा की तरह लड़कर बीरेंद्र सिंह के गढ़ को फतेह करने में कामयाबी हासिल की। दुष्यंत चौटाला भले ही सात साल से राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन उनकी पार्टी महज 11 महीने पुरानी है। ऐसे में 11 महीने की पार्टी ने उचाना कलां में 45 साल पुराने राजनीतिक परिवार को हराकर जीत का डंका बजाया है।
उचाना कलां विधानसभा क्षेत्र में अब तक कुल दस चुनाव हुए हैं। इनमें से छह चुनाव बीरेंद्र सिंह व उनके परिवार के लोगों ने जीते हैं। बीरेंद्र सिंह कांग्रेस के टिकट पर यहां से 1977, 1982 और 1991, 2005 में विजयी रहे तो 2014 में उनकी पत्नी प्रेमलता भाजपा के टिकट पर विधायक बनीं। अब तक यहां से दो बार चौटाला परिवार जीतने में सफल रहा है। 2009 के विधानसभा चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला ने इनेलो प्रत्याशी के रूप में बीरेंद्र सिंह को 621 मतों से हराया था। इसके बाद अब 2019 के चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला के पौत्र व जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता को हराया है।
उचाना कलां विधानसभा क्षेत्र के करसिंधु गांव में जीत के बाद लोगों को संबोधित करते दुष्यंत चौटाला?- फोटो : Jind
जेजेपी की जीत पर डांस कर खुशी जताते समर्थक।- फोटो : Jind
कार्यकर्ताओं से घिरे दुष्यंत चौटाला।- फोटो : Jind
उचाना कलां विधानसभा क्षेत्र से जीतने के बाद निर्वाचन अधिकारी राजेश कोथ से प्रमाण पत्र प्राप्त क?- फोटो : Jind
मतगणना केंद्र के बाहर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते दुष्यंत चौटाला।- फोटो : Jind