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Jind News: शहर में फ्लोराइड ज्यादा होने से भूजल का पानी पीने योग्य नहीं

Sat, 10 Jan 2026 12:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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09जेएनडी30-जन स्वास्थ्य विभाग ने गोहाना रोड पर लगाया गया टयूबवेल। संवाद - फोटो : लाइन का इंसुलेटर बदलता कर्मचारी।
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जींद। शहर में भूजल का पानी पीने योग्य नहीं है। इसमें फ्लोराइड ज्यादा है जो सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। इसमें नाइट्रेट की मात्रा भी कई जगहों पर ज्यादा है। वहीं शहर के व्यवसायिक क्षेत्र और सेक्टरों के लोग कैंपरों की सप्लाई पर निर्भर हैं।
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जन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी में कुल 45 सैंपल लिए गए जिसमें से पांच फेल पाए गए। इसके अलावा पिछले एक साल में जन स्वास्थ्य विभाग ने जिले भर से 5500 से ज्यादा सैंपल लिए जिसमें से 597 सैंपल फेल पाए गए थे। जिले में सेक्टरों को छोड़ 80 प्रतिशत आबादी नलकूप के पानी पर निर्भर है।
वहीं सेक्टर एरिया में नहरी सप्लाई होती है। जिले के अधिकतर हिस्से में भूजल स्तर काफी ऊंचा है। शहर में जितने भी नलकूप लगे हुए हैं वो एक हजार फीट से भी गहरे लगे हुए हैं। उनका पानी भी पीने योग्य नहीं है। इनकी टीडीएस की मात्रा ज्यादा है। फव्वारा चौक के आसपास के एरिया में टीडीएस की मात्रा 250 से ऊपर है।
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वहीं नए बस स्टैंड के पास तो यह आंकड़ा 1200 से भी ऊपर है। वहां का भूजल तो हाथ धोने योग्य भी नहीं है। शहर के बीच गुजर रही नहर के आसपास लगे नलकों से शहरवासी पीने का पानी लेकर जाते हैं। हालांकि नहर के पास भूजल की टीडीएस मात्रा 200 के आसपास है लेकिन मेन बाजार और रोहतक रोड की तरफ तो टीडीएस 500 से ज्यादा है। सेक्टरों के लिए बनाए गए जलघर के पास टीडीएस की मात्रा 300 है। वहां आसपास लगे नलकूपों से सुबह-शाम काफी संख्या में लोग पानी भरने के लिए आते हैं।बॉक्स
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दूषित पानी में खतरनाक तत्व, सेहत पर पड़ रहा गंभीर असर
दूषित पानी में सबसे आम तत्व बैक्टीरिया और वायरस होते हैं। इनमें ई.कोलाई, साल्मोनेला, हैजा और टायफायड फैलाने वाले जीवाणु शामिल हैं। ऐसे पानी के सेवन से दस्त, उल्टी, बुखार और पेट संबंधी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका प्रभाव अधिक घातक होता है। दूषित पानी में भारी धातुएं (हेवी मेटल्स) भी पाई जाती हैं। इनमें सीसा, पारा, आर्सेनिक, कैडमियम और क्रोमियम हैं। लंबे समय तक इनका सेवन करने से किडनी, लिवर और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचता है।

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दूषित पानी का शुद्धिकरण जरूरी है। पानी को उबालकर, फिल्टर या आरओ सिस्टम के माध्यम से ही उपयोग में लाना चाहिए। दूषित पानी से पेट संबंधी रोग होते हैं।-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस
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सप्लाई पेयजल की पूरी तरह से सफाई होती है। इसके बाद शहर में सप्लाई की जाती है। इसका टीडीएस भी ठीक है। समय-समय पर सैंपल लिए जाते हैं।-भानू प्रताप, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग जींद
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