जींद। चिकित्सा का पेशा केवल दवाइयों और उपचार तक सीमित नहीं होता बल्कि इसमें मानवीय संवेदनाएं, करुणा और जीवन के प्रति गहरी समझ भी जुड़ी होती है। डॉ. रजनीश जैन इसकी जीवंत मिसाल हैं। मरीजों के दर्द को समझने और उन्हें राहत देने के साथ-साथ उनका प्रकृति के प्रति प्रेम भी उतना ही गहरा है।
इसी प्रेम का परिणाम है कि उन्होंने घर को 70 से अधिक फूलदार, सजावटी और औषधीय पौधों की सुंदर बगिया बनाई है। डॉ. रजनीश जैन के घर में पैरोनिया, पेंसी, डलिया, गुलवाटी, एरोकेरिया, एरिकापाल्म, मनी प्लांट, रबर प्लांट, मधुकामनी, अपराजिता, चंपा, चमेली, गुड़हल, तुलसी, कनेर, स्नेक प्लांट, पत्थरचट्टा, डेफनडिचिया, गुलाब, नींबू, कड़ी पत्ता, सदाबहार, एलोवेरा, चैड प्लांट, अजवाइन, पुदीना, चाइना पाम जैसे पौधे लगे हुए हैं।
इनमें से कई पौधे न केवल घर की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर हैं और रोजमर्रा की छोटी-बड़ी बीमारियों में उपयोगी भी हैं। डॉ. जैन बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही पौधों और प्रकृति से विशेष लगाव रहा है। यही शौक आज भी उसी समर्पण के साथ जीवित है। खास बात यह है कि इन पौधों की देखभाल के लिए उन्होंने कभी माली नहीं रखा। पौधों की निराई-गोड़ाई से लेकर पानी देना, खाद डालना और छंटाई तक का हर काम वे स्वयं करती हैं। उनके लिए यह काम थकान नहीं, बल्कि मानसिक सुकून और ऊर्जा का स्रोत है।
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संवेदनशीलता और धैर्य की आवश्यकता होती है
चिकित्सक के रूप में जहां वह मरीजों को स्वस्थ जीवन का संदेश देती हैं, वहीं अपने घर की बगिया के माध्यम से वे यह भी सिखाती हैं कि प्रकृति के करीब रहकर ही इंसान शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकता है। उनका मानना है कि जैसे पौधों को समय, देखभाल और प्रेम की जरूरत होती है, वैसे ही मरीजों को भी संवेदनशीलता और धैर्य की आवश्यकता होती है।