नरवाना। सामाजिक कार्यकर्ता व हेल्थ कोच अश्वनी दीवान प्राकृतिक जीवनशैली, फलाहार, ध्यान और व्यायाम के जरिये लोगों को स्वस्थ रहने की प्रेरणा दे रहे हैं। चार साल से दूध और तली-भुनी चीजें छोड़कर दूसरों को भी इसे न खाने के लिए कहते हैं। फलाहार का मुफ्त प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
दीवान बताते हैं कि करीब डेढ़ दशक पहले गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बाद बिना दवाओं के स्वस्थ जीवन के विकल्पों पर शोध शुरू किया। इस दौरान विभिन्न प्राकृतिक पद्धतियों का अध्ययन किया। खुद पर प्रयोग कर उनके प्रभावों को समझा।
पिछले चार वर्षों से उन्होंने दूध और दूध से बने उत्पाद छोड़ रखे हैं। कुछ समय फलाहार करके स्वास्थ्य में आए बदलावों को परखा। यही दूसरों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। इससे थायराइड, कब्ज, बवासीर, पथरी, हाई ब्लड प्रेशर, गठिया, तनाव, त्वचा रोग और फैटी लीवर जैसी समस्याएं दूर हो गईं।
अभी वह नरवाना के नन्हूमल कॉम्प्लेक्स में निशुल्क फलाहार प्रशिक्षण दे रहे हैं। ऑनलाइन जूम के माध्यम से देश-विदेश के लोगों को स्वास्थ्य मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहे हैं।
वर्जन
अप्रैल में फलाहार शिविर में भाग लेने के बाद बढ़ी शुगर का स्तर काफी ठीक हो गया है। जीवनशैली में बदलाव और फलाहार से दवाएं घटी हैं। सकारात्मक परिवर्तन भी महसूस कर रहा हूं।
–राजबीर पंघाल, सेवानिवृत्त जेई, बीएसएनएल
वर्षों से गठिया से परेशान था। फलाहार, मेडिटेशन और जीवनशैली में बदलाव से बहुत सुधार महसूस कर रहा हूं। रूटीन काम भी अच्छे से कर पा रहा हूं।
–राकेश मित्तल, नरवाना के व्यवसायी।
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फल और संतुलित आहार के बूते मात्र 15 दिन में 105 किलो से 18 किलो घटकर 87 किलोग्राम हो गया है। दवाएं बंद हैं। शरीर की सूजन भी घट चुकी है। बहुत हल्का महसूस कर रहा हूं।
–लक्ष्मण मिर्धा, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के पूर्व सदस्य।
अश्वनी दीवान के मार्गदर्शन में फलाहार बढ़ाकर 10 किलो वजन घटा चुका हूं। पहले 93 किलो था, अब 83 किलो है। कब्ज, पाचन, दर्द, अकड़न भी खत्म हो गई है।
–अनुभव गर्ग, जगाधरी के व्यापारी।
फोटो 10 नरवाना। फलाहार करते हुए बीके अश्वनी दीवान।- फोटो : 1
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