जींद। सृष्टि के संचालनकर्ता भगवान विष्णु 10 जुलाई से योग निद्रा में आराम करेंगे। इस दौरान चार नवंबर तक भगवान शिव सृष्टि का संचालन करेंगे। चार माह के लिए मांगलिक कार्य जैसे विवाह, सगाई नहीं हो पाएंगे। चार नवंबर के बाद फिर से मांगलिक कार्य शुरू हो। विवाह के लिए दिसंबर महीने में शुभमुहूर्त शुरू होंगे।
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे भगवान विष्णु के शयन उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह एकादशी 10 जुलाई से शुरू होगी। इस दिन से भगवान विष्णु भगवान शिवजी की साधना के लिए चातुर्मास का प्रारंभ करेंगे। इस दौरान सृष्टि का संचालन भी भगवान शिव ही करेंगे। चातुर्मास में जप, व्रत, दान, कथा श्रवण आदि के साथ शिव शक्ति एवं भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। देवशयनी एकादशी से विवाह जैसे मांगलिक कार्य देवउठनी एकादशी तक बंद हो जाएंगे। इस साल देवउठनी एकादशी चार नवंबर को मनाई जाएगी, लेकिन विवाह का प्रथम सहालग दो दिसंबर शुक्रवार से शुरू होगा।
नवीन शास्त्री ने बताया कि देवशयनी एकादशी का प्रारंभ नौ जुलाई को शाम 4.39 से शुरू होगा। यह 10 जुलाई दोपहर 2.13 बजे तक रहेगा। इसके बाद भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाएंगे। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषशैय्या पर आराम करने के लिए चले जाते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि इस संसार की सत्ता को भगवान विष्णु की आज्ञा से भगवान भोलेनाथ चार माह के लिए संभालते हैं। इसलिए चातुर्मास में भगवान विष्णु की आराधना के साथ-साथ शिव शक्ति की आराधना विशेष रूप से की जाती है।
विवाह के लिए शुभ मुहूर्त
महीना तारीख
दिसंबर 2, 8, 9, 14
जनवरी 25, 26
फरवरी 6, 9, 10, 15, 16, 22
मार्च 8, 9