कुमाऊं सभा के सचिव गोविंद बिष्ट ने बताया कि जींद में उत्तराखंड के सैकड़ों परिवार तीन-चार पीढि़यों से स्थायी निवासी के रूप में रहते हैं। इनकी समाजसेवी संस्था कुमाऊं सभा लगातार समाजहित के कार्य कर रही है। उत्तराखंड देवभूमि है और आज भी मरणोपरांत परिवार के लोग 13 दिन तक पितरों की आत्मा शांति के लिए पूजा-पाठ और कर्मकांड करते हैं। इस कार्य में 13 दिन तक हर रोज तीन से चार घंटे का समय लगता है। कोई भी वैध जगह न होने के कारण हांसी नहर के किनारे इधर-उधर बैठकर यह कार्य करने पड़ते हैं। इससे कई बार लोगों से कहासुनी भी हो जाती है। पूजा बीच में ही बंद करनी पड़ती है। इसके साथ-साथ कई अन्य समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं से बचने के लिए कुमाऊं सभा ने विधायक डाॅ. कृष्ण मिड्ढा को ज्ञापन सौंपकर नदी पर घाट बनाने की मांग की है, ताकि पितरों की होने वाली पूजा में किसी भी प्रकार की रुकावट न आए। इस अवसर पर कुमाऊं सभा के गोपाल सिंह रावत, भुवन गिरी, दिनेश गौतम, दीपक गौतम मौजूद थे।
28जेएनडी07: विधायक को ज्ञापन सौंपते हुए कुमाऊं सभा के सदस्य। संवाद