जींद। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की कॉल पर जिले के आयुष्मान पैनल के सभी अस्पतालों ने वीरवार को आयुष्मान कार्ड पर इलाज बंद कर दिया। इससे आमजन की परेशानी बढ़ गई है। इस दौरान नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई। इससे लोगों दवाइयां भी बाहर ने खरीदनी पड़ी।
इसके अलावा जब मरीज नागरिक अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे तो वहां पर मरीजों को जरूरत के अनुसार दवाइयां नहीं मिली। इसमें कई महिला व बुजुर्गों ने बताया कि चिकित्सक ने चार तरह की दवाई लिखी थी तो उनको तीन तरह की दवाई देकर वापस लौटा दिया गया।
जिले में कुल 37 अस्पताल सरकारी व 19 निजी अस्पताल आयुष्मान पैनल पर हैं। इन निजी अस्पतालों में प्रतिदिन लगभग 10 से 15 ऑप्रेशन व अन्य ओपीडी होती है जबकि 20 से 25 मरीज दाखिल होते हैं।
जिला में लगभग पौने आठ लाख से अधिक लोगों के आयुष्मान व चिरायु कार्ड भी बने हुए हैं। अब निजी अस्पतालों ने करोड़ों रुपये का बकाया होने के चलते उपचार के लिए अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। निजी चिकित्सकों का कहना है कि जब तक भुगतान नहीं होगा तब तक आयुष्मान पैनल पर अस्पताल काम नहीं करेंगे। किसी तरह के ऑप्रेशन नहीं किए जाएंगे।
यह हैं जींद में आयुष्मान पैनल के निजी अस्पताल
मीनीक्षी जैन अस्पताल, गोयल हड्डियों का अस्पताल, यूरो केयर अस्पताल, मित्तल आई अस्पताल, आस्था अस्पताल, शर्मा आई अस्पताल, मेट्रो जींद अस्पताल, बाल धर्मार्थ अस्पताल, सर्वोदय अस्पताल, आस्था अस्पताल, जींद हर्ट अस्पताल, नारायणा अस्पताल,ऑस्कर हर्ट अस्पताल, श्री ज्ञानीराम मैमोरियल अस्पताल, सरस्वती आई केयर सेंटर, मंगला अस्पताल
बाक्स
छाती में लगी चोट की दवाई लेने के लिए आया था। ओपीडी स्लीप में चिकित्सक ने तीन तरह की दवाई लिखी है लेकिन दवा खिड़की से दो तरह की दवाई दी गई। अब एक दवाई बाहर से लेनी पड़ेगी।
ईक्कस निवासी धर्मपाल, मरीज
बाक्स
बेटी को बुखार की दवाई दिलाने आई थी। चिकित्सक ने ओपीडी स्लीप में तीन तरह की दवाई लिखी थी। दवा खिड़की से दो तरह की मिली है। एक दवाई बाहर से लेने के लिए बोला गया है।
भंभेवा निवासी रीना, मरीज
वर्जन
निजी अस्पतालों की ओर से आयुष्मान पात्र लोगों के आप्रेशन न किए जाने बारे उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान व चिरायु कार्ड धारकों के आप्रेशन किए जा रहे हैं। आयुष पैनल के अस्पतालों की जो समस्या है वो उच्चस्तर की है। उम्मीद है कि जल्द ही समस्या का निदान हो जाएगा।
डॉ. राजेश भोला डिप्टी एमएस नागरिक अस्पताल जींद।
वर्जन
19 निजी अस्पतालों को सरकार ने 2300 करोड़ का भुगतान किया है लेकिन यह कम है। एक समस्या पहले से तय किए गए रेट के बावजूद बेवजह कटौती को लेकर भी है। पिछले छह साल से मरीजों के इलाज का रेट भी सरकार द्वारा बढ़ाया नहीं गया है जबकि महंगाई के कारण इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है ऐसे में अस्पतालों की ऐसी मजबूरी हैं कि वह पुराने रेट पर इलाज कर पाने में सक्षम महसूस नहीं कर रहे हैं।
डॉ. अनिल जैन आईएमए जिला प्रधान