नगर पालिका में हुई नियमों को ताक पर रख कर दो करोड़ रुपये से अधिक घोटाले के मामले में को लेकर भाजपा समर्थक चेयरपर्सन सहित दस नपा के अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। प्रशासन ने यह जांच पार्षद विद्या प्रकाश सहित अन्य पार्षदों की शिकायत पर की है। एसडीएम डॉ. किरण सिंह की अगुवाई में बनी टीम ने जांच के बाद डीसी जींद को रिपोर्ट सौंपी। डीसी विनय सिंह के आदेशों पर थाना पुलिस में मामला दर्ज किया गया। जब टीम ने जांच के बाद डीसी को रिपोर्ट सौंपी तो इसमें नपा की ओर से की गई गड़बड़ी सामने आई।
केंद्रीय मंत्री, सांसद ने दिए थे जांच के आदेश
नपा से हुई दो करोड़ रुपये से अधिक की पेमेंट को लेकर बीते साल सांसद दुष्यंत चौटाला ने जिला अधिकारियों की बैठक में जांच के आदेश दिए थे। दो जनवरी को केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने उचाना उपमंडल परिसर में नपा पार्षदों की बैठक में डीसी जींद को 15 दिनों के अंदर जांच के निर्देश दिए थे। केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर डीसी ने एसडीएम नरवाना डॉ. किरण सिंह की अगुवाई में जांच कमेटी गठित की थी, जिसमें नरवाना के लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन, जींद नगर परिषद के एमई को शामिल किया गया।
टीम ने करीब दो महीने की जांच
टीम ने करीब दो महीने तक इस मामले की जांच की। जांच के दौरान नपा से हुई गलियों के निर्माण सहित अन्य को लेकर मौके स्थल पर भी टीम ने पहुंच कर जांच कर लोगों से बातचीत की। जांच कमेटी द्वारा की गई पेमेंट के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, नपा चेयरपर्सन के बयान भी कलमबंद किए। कुछ अधिकारियों ने तो जांच कमेटी के समक्ष पेमेंट के बिल तैयार न करने, इन बिलों पर हस्ताक्षर नहीं होने की बात भी कही है। अब यह हस्ताक्षर उन काजगों पर किसने किए यह भी बड़ा सवाल है। यह भी पुलिस को पता लगाना है कि जो बिल तैयार किए गए है उसमें मास्टर माइंड कौन है, जिसने अधिकारियों के हस्ताक्षर तक बिलों पर किए हैं।
कायदे-कानून ताक पर रख कर हुई पेमेंट
जांच में सामने आया कि उचाना पालिका ने जिन दो करोड़ आठ लाख रुपये का भुगतान किया है, उन विकास कार्यों का कोई रिकॉर्ड उचाना पालिका में नहीं मिला। इसमें न तो इन विकास कार्यों को मंजूरी देने के लिए उचाना नगर पालिका का कोई प्रस्ताव न दिखाया गया और न ही विकास कार्यों को लेकर एमबी प्रस्तुत की गई। एमबी वह अहम दस्तावेज होता है कि जिसमें यह दर्ज होता है कि कितना काम कितने पैसे में कराया गया है। इसमें विकास कार्यों का पूरा ब्यौरा होता है, साथ ही विकास कार्यों के रनिंग बिल भी लगे होते हैं। यह विकास कार्य कब हुए और विकास कार्य ई-टेंडर जारी कर ठेकेदारों से कराए गए या फिर यह विभागीय स्तर पर कराए गए, इस तरह का भी कोई रिकॉर्ड जांच टीम के सामने पेश नहीं किया गया।
इनके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
पुलिस ने गबन, हेराफेरी, झूठा रिकॉर्ड तैयार करने, भ्रष्टाचार फैलाने सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। नपा चेयरपर्सन वीना रानी, तत्कालीन सचिव राजेंद्र सिंह, हंसराज, अमन ढांडा, तत्कालीन अभियंता आरडी गोयल, नितेश कुमार, कनिष्ठ अभियंता राजेश दलाल, विजय धीमान, आरओ चंद्रभान, सेवादार राजकुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
राजकुमार, थाना प्रभारी, उचाना