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दफनाने को विवाद

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कब्रिस्तान में शव दफनाने को लेकर विवाद
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अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना। गांव कर्मगढ़ में बुधवार सुबह एक महिला के शव को दफनाने को लेकर विवाद हो गया। इसकी सूचना पुलिस को दी गई और सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन, बीडीपीओ और तहसीलदार मौके पर पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में शव को दफनाया गया। जिसको लेकर मुस्लिम समाज के लोगों में रोष है। मंगलवार सायं गांव कर्मगढ़ में मुस्लिम समुदाय के राजेंद्र की पत्नी कृष्णा का बीमारी के कारण निधन हो गया। बुधवार सुबह उनके शव को पंचायत द्वारा कब्रिस्तान के लिए दी आधा एकड़ जमीन में दफनाने की तैयारी चली तो गांव के एक किसान ने विरोध शुरू कर दिया। इसकी सूचना गांव के सरपंच को दी गई। इसकी सूचना गांव की सरपंच केलोदेवी के पति राजेंद्र ने पुलिस को दी। घटना की सूचना मिलते ही सदर और शहर थाना प्रभारी गांव में पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी लेकर शव को दफनाया। किसान जयपाल व उसके भाई रोशन ने पुलिस को बताया कि वह जमीन उन्होंने पंचायत से बोली से ठेके पर ली है। लेकिन बीडीपीओ राजेश टिवाना और तहसीलदार बालकृष्ण द्विवेदी ने बताया कि जमीन का ठेका रद्द हो चुका है।


पंचायती जमीन को ठेके पर देने को चल रहा है विवाद
गांव की पंचायत ने 2013 में पंचायती जमीन में से आधा एकड़ जमीन मुस्लिम समाज को कब्रिस्तान के लिए थी लेकिन अप्रैल में करीब तीन एकड़ जमीन को ठेके पर देते समय उस आधा एकड़ जमीन का नंबर अटैच हो गया। जब पंचायत के संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होंने ठेके पर जमीन लेने वाले किसान से कब्रिस्तान की जमीन छोड़ने की अपील की लेकिन वह नहीं माना। किसान यह मामला एसडीएम कोर्ट में ले गया जहां से मामला पंचायत के हक में करते हुए किसान को ठेका व खर्चे के पैसे देने के आदेश दिए गए। पंचायत ने करीब तेरह हजार का चेक किसान जयपाल को भेजा लेकिन उसने वापिस कर दिया। वह सिविल कोर्ट में चला गया जिसका मामला अभी लंबित है।
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ठेका रद्द कर दिया गया है: बीडीपीओ
बीडीपीओ राजेश टिवाना ने बताया कि पंचायत की जमीन ठेके पर देते समय गलती से उस जमीन का नंबर चला गया जो पहले ही पंचायत ने कब्रिस्तान के लिए मुस्लिम समाज को दी थी। मामला संज्ञान में आने के बाद एसडीएम कोर्ट से उसे ठेके की रकम वापिस देने के आदेश कर दिए लेकिन बुधवार को कथित ठेकेदार किसान ने शव दफनाने का विरोध किया। पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में शव को दफनाया गया।
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कानून से ऊपर कोई नहीं: एसएचओ सदर
सदर एसएचओ हरिओम ने कहा कि जमीन पंचायत की है। पंचायत ने कब्रिस्तान के लिए मुस्लिम समाज को दी है। कहीं गलती से साथ की जमीन ठेके पर देते समय नंबर चला गया। प्रशासन ने किसान से छोड़ने को कहा है। खर्चा पंचायत ने उसे दिया था लेकिन शव को दफनाने का किसान ने विरोध किया था जो जायज नहीं था।
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