स्कूलों में सैंपलिंग करती स्वास्थ्य विभाग की टीम।
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स्वास्थ्य विभाग अब कोरोना जांच तथा वैक्सीनेशन पर अधिक जोर देगा। अस्पताल प्रशासन अब प्रतिदिन दो हजार सैंपल लेने की योजना पर काम करेगा। इनमें 18 वर्ष से कम आयु के एक हजार तथा इससे ऊपर आयु वर्ग के लोगों के भी एक हजार से अधिक सैंपल रोजाना लिए जाएंगे। सैंपल लेने के लिए मोबाइल टीमों का गठन किया जाएगा तथा स्कूलों में जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा।
फिलहाल सभी स्कूल खुल चुके हैं। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर अधिक असर होने की आशंकाओं के बीच स्कूलों में सैंपलिंग बढ़ाई जाएगी ताकि संक्रमण को फैलने से तुरंत रोका जा सके। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना जांच का दायर सीमित होने के कारण भी बच्चों के सैंपल अधिक लेने की योजना बनाई जा रही है। यदि किसी बच्चे में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होती है तो तुरंत उसके माता-पिता की भी जांच की जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी कोरोना जांच का दायरा बढ़ेगा। यदि किसी बच्चे में संक्रमण की पुष्टि नहीं होती है तो इसका मतलब है कि उसका परिवार भी फिलहाल सुरक्षित है। इसके अलावा ग्रामीण लोगों को कोरोना जांच के लिए जागरूक करने के लिए भी शिविर लगाने की योजना है।
डीसी नरेश नरवाल ने बंद कमरे में चिकित्सा अधिकारियों की बैठक ली। इस बैठक में चिकित्सकों ने ग्रामीण क्षेत्र में सैंपल नहीं होने की बात कही। इस पर डिप्टी सिविल सर्जन स्तर के एक अधिकारी ने सुझाव दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सैंपलिंग यदि नहीं बढ़ रही है तो स्कूलों में सैंपलिंग बढ़ाई जाए। यदि कोई बच्चा संक्रमित मिलता है तो तुरंत उसके परिवार के लोगों की भी सैंपलिंग करनी होगी। यदि बच्चे सुरक्षित हैं तो उनके परिवार के लोग भी सुरक्षित हैं।
न सिविल सर्जन मिले और न ही पीएमओ
डीसी नरेश नरवाल ने सोमवार को नागरिक अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान उन्हें न तो सिविल सर्जन डॉ. जेएस पूनिया मिले और न ही पीएमओ डॉ. अनिल बिरला। जब उन्होंने पूछा तो दूसरे अधिकारियों ने बताया कि सिविल सर्जन के पास रोहतक का भी अतिरिक्त कार्यभार है तथा पीएमओ छुट्टी पर हैं। इस पर डीसी ने कहा कि ऐसे दो-दो जिलों का कार्यभार होने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी। वह उच्चाधिकारियों से इस बारे में बात करेंगे कि एक सिविल सर्जन को एक ही जिला मिले।