जींद। भिवानी रोड निवासी प्रीति के पति पवन की एक महीना पहले कोरोना संक्रमण के चलते मौत हो गई। इससे प्रीति के साथ-साथ तीन बच्चों पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। प्रीति बनाती हैं कि उनके पति कृषि सलाहकार का काम करते थे और अपने परिवार का पेट पाल रहे थे। अब उनके नहीं रहने से भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा है।
तीन बच्चों के पालन-पोषण का बोझ अब प्रीति के कंधों पर आ गया है। अभी तक वह घर में रह कर ही बच्चों को संभालती रही हैं, लेकिन अब भविष्य की चिंता सता रही है। पवन की मौत के बाद घर सूना हो गया है। अभी तक परिवार को प्रशासन से किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली है। ऐसे में प्रीति को सबसे अधिक चिंता बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की है। प्रीति की दो बेटी व एक बेटा है। प्रीति के अनुसार बच्चों की आंखें हर समय पिता को ढूंढती रहती हैं।
जरूरतमंद बच्चों की सहायता के लिए हर समय तैयार
कोरोना में ही नहीं अन्य किसी कारण से भी यदि कोई बच्चा अनाथ होता है तो उसके लिए बाल कल्याण परिषद तैयार है। अनाथ भी नहीं यदि वैसे भी किसी बच्चे को जरूरत है तो उसकी मदद की जाती है। इसके लिए 1098 नंबर पर सूचना दी जानी चाहिए। जिले में लड़कियों के लिए एपीजे अब्दुल कलाम आजाद आश्रम बनाया गया है। इसमें बच्चे रह भी रहे हैं।
आठ साल तक के लड़कों के लिए भी जगह
जींद में बने शेल्टर होम में सिर्फ लड़कियों को रखने का प्रावधान है। आठ साल तक लड़कों को भी रखा जा सकता है। यदि इससे बड़े लड़के हैं तो उन्हें दूसरे जिलों में भेजने की व्यवस्था है। लोगों से अपील है कि यदि उनकी जानकारी में कोई भी ऐसा बच्चा है तो उनकी जानकारी जरूरत दें। इस प्रकार के कुछ बच्चों को रखा भी गया है।
-अनिल सिंगला, जिला बाल कल्याण अधिकारी।