जींद। एडीआर के सभागार में रविवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मोनिका की अध्यक्षता में बाल विवाह के खिलाफ कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें सीजेएम ने कहा कि बाल विवाह करना दंडनीय अपराध है।
कार्यशाला में पैनल अधिवक्ता, अधिकार मित्र और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इसमें सीजेएम मोनिका ने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अनुसार अवयस्क लड़का-लड़की का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है। बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है। इसके तहत दो वर्ष तक कठोर कारावास की सजा या एक लाख रुपये या दोनों एक साथ दंड किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि बाल विवाह का आयोजन करने वाले व उसमें शामिल होने वाले भी दंडनीय हैं। इसलिए सभी का दायित्व बनता है कि जहां भी बाल विवाह हो रहा हो तो उसकी शिकायत पुलिस थाना, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी या मैट्रो पोलिटन मजिस्ट्रेट के सम्मुख दर्ज करवाई जा सकती है। उन्होंने लोगों को 15100 नालसा टोल फ्री नंबर प्रिंटेड स्टीकर प्रदान किए तथा उन्हें पब्लिक पैलेस, पंचायत घर आदि में चस्पा करने के लिए कहा। ताकि आमजन को मुफ्त कानूनी सलाह घर बैठे फोन पर उपलब्ध हो सके। इस अवसर पर अधिवक्ता देवराज मलिक ने भी बाल विवाह अधिनियम विस्तार से जानकारी दी तथा मार्च माह में राष्ट्रीय लोक अदालत व प्रत्येक कार्य दिवस को विशेष लोक अदालत की जानकारी दी।