जींद। सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार के लिए जिले में कैप्सूल स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम लागू किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत जींद के 65 सरकारी विद्यालयों का चयन किया गया है।
इन विद्यालयों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों, सीखने के स्तर और कक्षा-कक्ष में शिक्षण प्रक्रिया का आकलन कर आवश्यक अकादमिक सहयोग उपलब्ध करवाया जाएगा।
राज्य परियोजना निदेशक, हरियाणा पंचकूला की ओर से कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत प्रत्येक चयनित विद्यालय की अकादमिक स्थिति को समझकर कमजोर क्षेत्रों की पहचान की जाएगी।
विद्यार्थियों को किन विषयों या दक्षताओं में कठिनाई आ रही है, शिक्षण प्रक्रिया में किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है और विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों का किस प्रकार बेहतर उपयोग किया जा सकता है, इन पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के सीखने के स्तर के साथ शिक्षकों द्वारा अपनाई जा रही शिक्षण विधियों, कक्षा-कक्ष की प्रक्रिया और उपलब्ध शिक्षण सामग्री की भी समीक्षा की जाएगी। आकलन के आधार पर विद्यालयों को उनकी आवश्यकता के अनुसार शैक्षणिक मार्गदर्शन दिया जाएगा। इससे कमजोर क्षेत्रों में सुधार के लिए समयबद्ध गतिविधियां तैयार करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम की निगरानी में क्लस्टर हेड, डाइट फैकल्टी, खंड शिक्षा अधिकारी, जिला समन्वयक एफएलएन, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, एडीसी और मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी की भूमिका रहेगी। अधिकारी नियमित रूप से विद्यालयों का दौरा कर कार्यक्रम की प्रगति देखेंगे।
एफएलएन के तहत बुनियादी दक्षताओं पर रहेगा फोकस
प्रारंभिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की भाषा और गणना संबंधी बुनियादी दक्षताओं को मजबूत करना भी कार्यक्रम का अहम हिस्सा रहेगा। बच्चों के सीखने के स्तर का आकलन कर जरूरत के अनुसार सुधारात्मक गतिविधियां करवाई जाएंगी। शिक्षकों को भी विद्यार्थियों की जरूरत के अनुरूप शिक्षण रणनीति तैयार करने में अकादमिक सहयोग मिलेगा।
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विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में स्थायी सुधार के लिए विद्यालय प्रमुखों, शिक्षकों और विभागीय अधिकारियों का समन्वित प्रयास जरूरी है। चयनित विद्यालयों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता के अनुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। कार्यक्रम के तहत विद्यालयों को उनकी वास्तविक शैक्षणिक जरूरत के अनुरूप सहयोग देना प्राथमिकता रहेगी, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर सीखने का वातावरण मिल सके। -राजेश वशिष्ठ, जिला समन्वयक एफएलएन