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डेरे की जमीन ट्रस्ट को देने का विरोध

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उचाना कलां गांव में लोगों ने मंगलवार को बैठक कर बाबा दुधाधरी हरिगिरी गोशाला की संपत्ति ट्रस्ट को देने का विरोध किया। सोमवार को पंडित रामकुमार शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणोें ने प्रशासन पर बाबा संपत्ति पर कब्जा करवाने के आरोप लगाए।
ग्रामीणों ने कहा कि यहां पर स्वामी गणेशानंद धर्मार्थ के नाम से जो ट्रस्ट बनाया गया है वह कथितरूप से फर्जी है। ग्रामीणों के अनुसार इस मामले में की जांच के दौरान यह सिद्ध हो गया कि ट्रस्ट बनाने में स्वर्गीय बाबा गणेशानंद को बहकाया गया था। फर्जी तरीके से ट्रस्ट का गठन किया गया।
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बाबा के अंगूठे के निशान और हस्ताक्षर की जांच से यह सिद्ध हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ 23 जुलाई 2013 को मामला दर्ज किया, लेकिन आज तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। दाड़न खाप के प्रधान देवा सिंह श्योकंद, कृष्ण श्योकंद, चरणा शर्मा, मांगेराम ने कहा कि बाबा दुधाधारी हरिगिर गोशाला की परंपरा रही है कि डेरे की जमीन पर एक साधु के बाद दूसरा साधु गद्दी संभालता है।
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 इस संपत्ति का वह मालिक नहीं होकर संरक्षक होता है। इस जमीन पर ट्रस्ट नहीं बन सकता है। इसको लेकर वो 21 बार सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व सैकड़ों बार जिला प्रशासन से मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि डेेरे की संपत्ति पर स्वामी कृष्णानंद का हक बनता है क्योंकि वो स्वामी गणेशानंद के शिष्य हैं। स्वामी गणेशानंद के शरीर त्यागने के बाद 17 फरवरी 2008 को उचाना कलां में आयोजित कार्यक्रम में पहुंच कर सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, तत्कालीन वित्त मंत्री बीरेंद्र सिंह की मौजूदगी में स्वामी कृष्णानंद को चद्दर दी थी। मठ की परंपरा है कि साधु को गद्दी की चद्दर देने का जब तक वो शरीर नहीं त्यागते तब तक वो डेरे का मालिक होता है।

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