जिला कारागार में बंद एक हत्या के आरोपी द्वारा जींद जिला अदालत में अधिवक्ता को 10 दिन में परिवार सहित जान से मारने की धमकी का मामला सामने आया है। पुलिस ने अधिवक्ता की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है। जिन लोगों ने धमकी दी है उन पर अधिवक्ता के परिवार पर हमला करने की पहले भी मामले दर्ज हैं। जिनमें अधिवक्ता के भाई की हत्या और अधिवक्ता के भाई की हत्या के प्रयास के मामले शामिल हैं।
सिविल लाइन थाना पुलिस को दी शिकायत में जींद के अधिवक्ता विनोद बंसल ने कहा है कि वह 30 जुलाई को सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर अपने चैंबर में मौजूद था तो उस उसके मोबाइल पर एक कॉल आई जोकि टू कोलर पर कॉलर का नाम प्रदीप लिखा आया था। उसने कॉल अटेंड की तो कॉल करने वाले ने उसे गंदी गंदी गलियां देते हुए धमकी दी कि 10 दिन के अंदर तुझे और तेरे परिवार को भी तेरे भाई की तरह ही गोलियां मारकर खत्म कर देंगे।
फिर 11 बजकर 22 मिनट पर उसी नंबर से कॉल आई जिसने फिर से गंदी गंदी गालियां देते हुए फिर से जान से मारने की धमकी दी और अपना नाम प्रदीप गट्टा बताया और कहा कि तेरे भाई को भी उसने और बलजीत पोकरी खेड़ी वगैरा ने मारा था और अब तेरा और तेरे परिवार का नंबर है। इसके बाद 1 बजकर 10 मिनट पर भी कई बार उसे कॉल करके धमकी दी और इस बार कॉल करने वाले ने धमकी देते हुए कहा कि वह प्रदीप गट्टा का भाई बोल रहा है।
विनोद बंसल ने बताया कि 16 अप्रैल 2016 को बलजीत पोकरीखेड़ी व धर्मेंद्र पहलवान गैंग ने उसके बड़े भाई पुरुषोतम को आपराधिक षडयंत्र रचकर किराए के शूटरों से गोली मरवा दी थी, पुरुषोतम की बाद में मृत्यु हो गई थी। इस केस में बलजीत, धर्मेंद्र गैंग व इनके शूटरों को सजा हो चुकी है। उस केस में अदालत से फरार होकर व जमानत पर बाहर आकर फिर से 23 नवंबर 21 को बलजीत धर्मेंद्र गैंग ने अपने तीन शूटरों से उसके दूसरे बड़े भाई श्याम सुंदर बंसल की 9 गोलियां मारकर हत्या कर दी थी।
इसका थाना शहर जींद में मामला दर्ज है। इस मामले में प्रदीप उर्फ गट्टा शूटर भी आरोपी है जो इस समय जींद जेल में बंद है। विनोद बंसल और उसके परिवार को पुलिस ने पहले से ही सुरक्षा दी हुई है। विनोद बंसल ने आशंका जताई है कि किसी भी वक्त उस पर व उसके परिवार पर ये गैंग जानलेवा हमला कर सकता है। इस गैंग पर 50 से अधिक हत्याओं, डकैती, अपहरण, हत्या प्रयास, टाडा एके 47 रखने, बुलेट प्रूफ जैकेट आदि के मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
विनोद बंसल का कहना है कि कोई भी पीड़ित आज तक इनके खिलाफ गवाही देने की हिम्मत नहीं कर पाया। सभी गवाह इनके डर व धमकियों की वजह से अदालत में आकर अपने बयानों से मुकर जाते हैं। उन्होंने हिम्मत दिखाई तो अपने 2 भाई खो दिए लेकिन वह इनको सजा दिलाना चाहते है और ये गैंग उन्हें डराकर अपने केसों की पैरवी से पीछे हटाना चाहता है।
पुलिस विभाग द्वारा दी गई सुरक्षा नाकाफी है, ज्यादातर समय गनमैन मोबाइल चलाते रहते हैं और ड्यूटी से नदारद रहते हैं। रिकॉर्ड में उन्हें 5 पुलिस कर्मी दिए गए हैं मगर मौके पर हकीकत कुछ और होती है। पुलिस ने इस मामले में प्रदीप गट्टा और उसके भाई के खिलाफ बीएनएस की धारा 232, 296, 351(3) के अंतर्गत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।