जींद। डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने किसानों से कहा कि वे सरकार की तरफ से संचालित फसल अवशेष प्रबंधन योजना का लाभ उठाकर अपनी कृषि भूमि की उर्वरता बढ़ाएं और आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करें। उन्होंने बताया कि किसान धान की पराली को मिट्टी में मिलाने के लिए अनुदान पर उपलब्ध सुपर सीडर, हैपी सीडर, जीरो टीलेज मशीन और रीवर्सिबल प्लो जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि किसान स्ट्रा बेलर मशीन का उपयोग कर पराली की गांठें बनाकर इसे बेच सकते हैं या सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रति एकड़ 1000 रुपये की प्रोत्साहन राशि का लाभ उठा सकते हैं। इससे किसानों को न केवल पराली के उचित प्रबंधन में सहायता मिलेगी, बल्कि उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी। फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण को भी नुकसान होता है और भूमि की उर्वरता भी प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देशानुसार, पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा।