जींद। पुलिस की घेराबंदी के बाद देहरादून में खुद को गोली मारकर खुदकुशी करने वाले जींद के आशरी गेट निवासी सुनील कपूर के भाई अधिवक्ता संजय ने पुलिस कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। संजय का आरोप है कि पुलिस ने सुनील काे आत्महत्या के लिए मजबूर किया और यह घटना हत्या जैसी ही है।
अधिवक्ता संजय ने कहा, 200-250 पुलिसकर्मियों के बीच सुनील का खुद को गोली मारना उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने जैसा है। आरोप लगाया कि जिले के तत्कालीन एसपी को बचाने के लिए यह सब प्लान किया था।
तत्कालीन एसपी, डीएसपी और तत्कालीन महिला पुलिस थाना प्रभारी ने उसके भाई के खिलाफ साजिश रची। पिछले साल शहर और सिविल लाइन थाने में दो बेनामी एफआईआर दर्ज हुईं लेकिन पुलिस ने उनके घर एक भी नोटिस नहीं भिजवाया।
पुलिस विभाग के भ्रष्टाचार उजागर किए थे सुनील ने : सुनील कपूर आरटीआई एक्टिविस्ट था। साल 2014-15 में उसने अपने फेसबुक पेज पर कई पुलिसकर्मियों के भ्रष्टाचार उजागर किए। इसके बाद से वह पुलिस के निशाने पर आ गया। उसने एक एएसआई को सजा दिलवाई जबकि एक अन्य एएसआई और ट्रैफिक थाना प्रभारी को रिश्वत केस में फंसवाया।
सुनील ने कई स्टिंग भी किए। सुनील ने डीएसपी रैंक के अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए डीजीपी और आईजी को शिकायत दी। सुनील और उसके भाई पर जालसाजी और वसूली का केस दर्ज हुआ था।
साल 2018 में दो बार हमला भी हुआ : सुनील कपूर पर साल 2018 में दो बार हमले हुए। 26 मार्च 2018 को नकाबपोश हमलावरों ने उसके घर में घुसकर फायरिंग की और सुनील और उसके माता-पिता को पीटा। दूसरी बार छह अप्रैल को कुछ नकाबपोश लोगों ने सुनील की ज्वेलरी दुकान में घुसकर उसे बुरी तरह पीटा था।