बंद पड़े ईंट-भट्ठे का फाइल फोटो।
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एनसीआर में आने वाले जिलों में सितंबर 2019 से एनजीटी के आदेशों पर ईंट भट्ठे बंद पड़े हैं। इनके बंद होने का दंश आम आदमी और इन पर काम करने वाले 30 हजार मजदूरों को झेलना पड़ रहा है। जिले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के पास 152 ईंट भट्ठे दर्ज हैं। प्रत्येक भट्ठे पर लगभग 200 मजदूर काम करते हैं। यह मजदूर पिछले एक वर्ष से खाली बैठे हुए हैं। इन मजदूरों को काम दिलाने व भट्ठों को चलवाने के लिए भट्ठा मजदूर यूनियनें भी धरना प्रदर्शन कर मांग कर चुकी हैं। एनजीटी के इन आदेशों के खिलाफ भट्ठा संचालकों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। अब न्यायालय में छह अक्तूबर को फिर से तारीख डाली गई है।
एनजीटी के आदेशों की अवहेलना पर छह भट्ठा संचालकों के खिलाफ की थी कार्रवाई
सितंबर 2019 में ईंट भट्ठों को एनजीटी के आदेशों पर बंद करवाया गया था। इसके बाद भी छह संचालकों ने आदेशों की अवहेलना करते हुए भट्ठों को चलाया था। इन पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए चालान किए हुए थे।
प्रदूषण कम हो, इसलिए अपनाई थी जिग-जैग तकनीक
भट्ठा संचालकों ने एनजीटी के आदेशों पर जिग-जैग तकनीक अपनाई थी। इस तकनीक पर प्रत्येक भट्ठा संचालक के लगभग 50 लाख रुपये खर्च करने पड़े थे। अब एनजीटी इस तकनीक के तहत भी भट्ठों को बंद करने के आदेश दे रही है।
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक राजेश आर्य ने बताया कि जिले में कुल 152 ईंट भट्ठे चल रहे हैं। ईंट भट्ठों के जिला प्रधान के माध्यम से सभी भट्ठा मालिकों को पत्र जारी कर निर्देश दिया गया है कि अगर किसी ने भी एनजीटी के नियमों के खिलाफ भट्टा चलाया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी। इसके लिए जिले के सभी सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी व निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्र के ईंट भट्ठों का मुआयना करें। यदि कोई भट्ठा चलते मिले तो उसकी सूचना तुरंत जिला कार्यालय में दी जाय।