बिना डिवाइडर के ऊबड़-खाबड़ बनाया गया बाल भवन रोड।
- फोटो : Jind
जिला विकास, समन्वय एवं निगरानी कमेटी की सोमवार को हुई बैठक में भाजपा विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा द्वारा नगर परिषद के विकास कार्यों में हुए भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के बाद अब जांच की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसको लेकर डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने नगर परिषद के अधिकारियों को अपनी फाइलों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि यदि किसी काम में गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित अधिकारी और व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाए। वहीं जांच होने तक काम रोकने के भी निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि सोमवार को हुई मीटिंग में विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने अंदेशा जताया था कि नगर परिषद में करीब पांच करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। इसको लेकर अब नप के अधिकारी वह रिकार्ड खंगालेंगे, जिनके साक्ष्य विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने दिए हैं। यदि इनमें गड़बड़ी पाई गई तो उस समय के अधिकारी और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। इसको लेकर नगर परिषद में मंगलवार को काफी गंभीर वातावरण रहा। हालांकि फिलहाल तक कोई भी पुरानी फाइल खोली नहीं गई है।
बीच में रुकवाया काम
भ्रष्टाचार के मामलों के बीच नगर परिषद द्वारा काम रुकवा दिया है। इसके लिए नगर परिषद के अधिकारियों ने ठेकेदारों को फोन कर कहा है कि फिलहाल पेवर ब्लॉक से बनाई जा रही सभी गलियों का निर्माण रोक दिया जाए।
एक करोड़ 75 लाख रुपये से बनने वाले बाल भवन रोड के निर्माण में खामी
वहीं विधायक द्वारा मीटिंग में बाल भवन रोड की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क का लेवल सही नहीं है और पुरानी टाइल्स लगाई गई है। इसके लिए एक करोड़ 75 लाख रुपये का टेंडर हुआ था, लेकिन यह सड़क पेवर ब्लॉक से ऊंची-नीची बनाई गई है। साथ ही कई जगह कट भी छोड़े गए हैं। वहीं नगर परिषद सूत्रों के अनुसार टेंडर में इस रोड के बीच में डिवाइडर बनाने का प्रावधान है, लेकिन ठेकेदार ने यहां डिवाइडर नहीं बनाया।
मीटिंग में ही नगर परिषद के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि विधायक द्वारा दी गई शिकायतों के आधार पर जांच की जाए। साथ ही यदि लिखित में और भी कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच की जाएगी। जब तक ऐसे काम रोक दिए गए हैं।
डॉ. आदित्य दहिया।