06जेएनडी27 :कथावचन करते हुए कथावाचक। स्रोत आयोजक।
नरवाना। बाबा गैबी साहब मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का संगम देखने को मिला। कथा का मुख्य विषय भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, माखन चोरी और गोवर्धन पूजा रहा।
कथा व्यास धर्मपाल शास्त्री नाभा वाले ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं हैं बल्कि उनमें आध्यात्मिक संदेश छिपा है। भगवान भक्त के हृदय रूपी माखन को चुरा लेते हैं। इसका अर्थ यह है कि निष्कपट और निश्छल भक्ति से ही ईश्वर को पाया जा सकता है। कथा का मुख्य आकर्षण गोवर्धन पूजा का प्रसंग रहा।
धर्मपाल शास्त्री ने बताया कि देवराज इंद्र के अहंकार को तोड़ने और प्रकृति की महत्ता को समझाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर धारण किया। यह प्रसंग मानव को प्रकृति पूजन, पर्यावरण संरक्षण और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ही वास्तविक आधार है जिसकी रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
जैसे ही पंडाल में गोवर्धन महाराज की झांकी सजाई गई, पूरा वातावरण गिरिराज धरण की जय के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक परिक्रमा की और भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। कथा के बीच-बीच में प्रस्तुत भजनों-मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो और इंद्र करे अभिमान, गोवर्धन पर्वत धार्यो रे-पर श्रद्धालु झूम उठे।
महंत अजयगिरि महाराज ने बताया कि छठे दिन की कथा में मथुरा गमन, कंस वध और भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह के भव्य प्रसंग सुनाए जाएंगे।
06जेएनडी27 :कथावचन करते हुए कथावाचक। स्रोत आयोजक।