27जेएनडी02-आर्य समाज रामनगर में आयोजित सत्संग में प्रवचन सुनाते हुए भजन उपदेशक। स्रोत श्रद्धालु
- फोटो : आंधी व बारिश में मकान के ऊपर टूटकर गिरा पेड़। संवाद
जींद। वैदिक भजनोपदेशक तन्नु आर्या ने कहा कि समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के लिए ही महर्षि दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना की थी। आर्य समाज ने सदैव राष्ट्र की विरासत को बचाने और वेदों के प्रचार-प्रसार का कार्य किया है। वह आर्य समाज रामनगर में आयोजित तीन दिवसीय वैदिक सत्संग समारोह के अंतिम दिन उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहीं थीं।
उन्होंने कहा कि आर्य समाज वैदिक सिद्धांत पर चलने का संदेश देता है। आर्य समाज सामाजिक, आत्मिक व शारीरिक उन्नति का संदेश देने के साथ सामाजिक दायित्वों और नियमों के निर्वहन की प्रेरणा देता है। संसार के कल्याण की कामना और प्राणियों में सद्भावना की विचारधारा आर्य सिद्धांतों में ही अंतर्निहित है। आर्य समाज सामाजिक समानता का पक्षधर है। वैदिक उपदेशिका आर्याशा दर्शनाचार्या ने कहा कि गुलामी के दौर में महर्षि दयानंद सरस्वती ने देश को आजादी का रास्ता दिखाया। कई महापुरुषों और क्रांतिकारियों ने महर्षि दयानंद से प्रेरणा लेकर देश की स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। इस मौके पर सुदर्शन देव आर्य, अजीत, कुलदीप, सत्यव्रत, आत्मप्रकाश, कंवर आर्य, सत्यनारायण आर्य, कर्ण सिंह, राजवीर आर्य, हरिलाल, रणवीर, राजवीर आर्य, विनीता गुलाटी, नरेश आर्य, अशोक गुलाटी, सुरेश शास्त्री और रामदयालु भी मौजूद रहे।
27जेएनडी02-आर्य समाज रामनगर में आयोजित सत्संग में प्रवचन सुनाते हुए भजन उपदेशक। स्रोत श्रद्धालु- फोटो : आंधी व बारिश में मकान के ऊपर टूटकर गिरा पेड़। संवाद