07जेएनडी16: महाराजा अग्रसेन मंदिर में आयोजित कीर्तन में पहुंचे श्रद्धालु। संवाद
उचाना। महाराजा अग्रसेन मंदिर में भजन कीर्तन में श्रद्धालुओं को संबंधित करते हुए मंदिर पुजारी अशोक शर्मा ने कहा कि मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए। जो अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं रखता है वह स्वयं के साथ दूसरों का भी अहित कर देता है। क्रोध विनाश और विपत्तियों का मूल कारण बन जाता है। ऐसे में सभी को क्रोध पर नियंत्रण रखते हुए उसे जड़ से खत्म करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्रोध में मनुष्य का विवेक शून्य हो जाता है और उचित-अनुचित का भेद भी भूल जाता है।
क्रोध में किए गए विनाशकारी कार्य व बोली गई कड़वी भाषाा के परिणाम भुगतने पड़ते हैं। संसार में जिसने भी पुरुषार्थ किया है, उसने सब कुछ पा लिया। जो व्यक्ति प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अनुकूल रहता है, उसका जीवन सार्थक होता है। अहंकार और क्रोध की चिंगारी जीवन और रिश्तों को नष्ट कर देती है। अगर क्रोध को खत्म करना है तो साधना के मार्ग पर कदम बढ़ाना होगा। साधना से क्रोध को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ये जरूरी नहीं है कि एक ही बार में सफलता मिल जाए। जीवन में सफलता एक दिन में नहीं मिलती है मगर ठान लो तो एक दिन जरूर मिलती है। जीवन में सफल होने के लिए निरंतर मेहनत करते रहना चाहिए। एक ना एक दिन सफलता जीवन में जरूर मिलेगी। सफलता अगर जल्दी नहीं मिले तो निराश नहीं होना चाहिए, क्या पता अगले कदम सफलता का इंतजार कर रहे हों। इसलिए पॉजिटिव सोच के तहत निरंतर मेहनती करनी चाहिए।