लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता।
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जींद। हरियाणा सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूलों के नाम पर एक निजी एनजीओ को सौंपने का विरोध शुरू हो गया है। शुक्रवार को लघु सचिवालय के बाहर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन धरना जिला प्रधान राजबाला की अध्यक्षता में शुरू कर दिया।
धरने पर जिला प्रधान ने कहा कि हरियाणा सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूलों के नाम पर एक निजी एनजीओ को सौंपकर जनविरोधी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एनजीओ को कोई रिपोर्ट नहीं देंगी। उन्होंने सरकार के इस जनविरोधी निर्णय के खिलाफ आंगनबाड़ी को ताले लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह ताले तब खुलेंगे तब हरियाणा सरकार और महिला एवं बाल विभाग की मंत्री आंदोलनकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का दमन बंद करेंगे। उन्होंने कहा कि बर्खास्त की गई यूनियन नेता कमला दयोरा को बहाल किया जाए। रंजिशन बनाए गए झूठे मुकदमों को वापस लिया जाए, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर को सरकारी श्रमिक का दर्जा व वेतन आयोग के अनुसार वेतन-भत्ते और अन्य सुविधाएं दी जाएं। सेवानिवृत्त होने पर पेंशन व मेडिकल सुविधा दी जाए। 22 जुलाई से यूनियन प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व हेल्पर की मांगों को लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा के कैथल आवास पर शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीके से धरना प्रदर्शन कर रही हैं। इसके बावजूद भी मांगों को नहीं माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पद चिह्नों पर चलकर आईसीडीएस विभाग के तहत चलने वाले आंगनबाड़ी को ही खत्म करने की ठान ली है। प्रधानमंत्री मोदी की जनविरोधी व राष्ट्र विरोधी निजीकरण की नीति को हरियाणा सरकार भी धड़ल्ले से लागू कर रही है। इस अवसर पर जिला सचिव दयावंती, सविता, बाला, सुनीता, उर्मिला, बबीता, अनीता, कृष्णा, लक्ष्मी, सुमित्रा, सुदेश, सुमन, संतोष व जगीरो मौजूद रहीं।