जींद। आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स यूनियन का धरना सोमवार को 13वें दिन भी लघु सचिवालय के सामने जारी रहा। धरने की अध्यक्षता जिला प्रधान भुला देवी व संचालन रमेश देवी ने किया। भुला देवी ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायकों की मेहनत के कारण देश पोलियो मुक्त हुआ है और पोषण की स्थिति सुधरी है। इसके बावजूद सरकार इस परियोजना को निजी हाथों में सौंपना चाहती है।
उन्होंने कहा कि योजना दो अक्तूूबर 1975 को सोनीपत के कथूरा ब्लॉक से शुरू की गई थी। स्कीम में वर्कर्स को छह सेवाएं और पांच उद्देश्य के लिए भर्ती किया गया। सरकार उन्हें लगातार नजरअंदाज करती आ रही है। प्रदेश सरकार ने 2018 में आंदोलन के चलते हुए जो समझौता किया था, उसे भी लागू नहीं किया जा रहा। केंद्र द्वारा घोषित 1500 व 750 रुपये नहीं दिए और न ही महंगाई भत्ता दिया गया। किसी भी प्रकार का सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महंगाई के बावजूद उनका वेतन नहीं बढ़ाया जा रहा। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत सरकार ने शिक्षा विभाग के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों को उजाड़ने का ठेका ले लिया है। एक तरफ जेबीटी अध्यापक भर्ती को बंद कर दिया है तो दूसरी तरफ वही काम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से थोड़े से मानदेय पर लेना चाह रही है। सरकार न केवल इस योजना को बल्कि देश के तमाम सरकारी विभागों व सार्वजनिक क्षेत्र को पूंजीपतियों के हाथों बेच रही है। ऐसे में 23 और 24 फरवरी को देश में हड़ताल की जाएगी। इस अवसर पर पुष्पा, सुदेश, मूर्ति, कमला, बीरमति, राजकुमारी, जयपति, सुनीता, लक्ष्मी, सीमा, पूनम, सरोज, कृष्णा, किताबो, राजेश देवी, दर्शना, मुकेश, कमला, सावित्री, लाजवंती व निर्मला भी मौजूद रहे।