संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। निपुण भारत योजना के तहत विद्यालयों में मेघा जांच अभियान चलाया जा रहा है। फाउंडेशनल लिट्रेसी एंड न्युमरेसी की ओर से पहली से तीसरी कक्षा के प्रत्येक बच्चे में पढऩे, लिखने एवं अंक गणित सीखने की क्षमता पैदा की जा रही है। इसके तहत इस वर्ष प्रत्येक बीईओ को 60 फीसदी बच्चों को निपुण बनाने का लक्ष्य दिया गया है।
निपुण भारत योजना के तहत खंड जुलाना के 58 प्राथमिक विद्यालयों का अवलोकन किया गया। इसमें जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारी, एबीआरसी, बीआरपी को निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई। सभी 60 अधिकारियों ने सुबह प्रार्थना समय में ही विद्यालय जाकर देखा कि शिक्षक संदर्शिका का प्रयोग कर रहे हैं या नहीं। वर्क बुक नियमित जांच हो रही है या नहीं, साप्ताहिक आंकलन हो रहा है क्या, कमजोर बच्चों को अलग से 30 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जा रहा है या नहीं। यह भी देखा गया कि मेरा सफर ट्रैकर को शिक्षक प्रतिदिन भर रहे हैं या नहीं। जिला समन्वयक राजेश वशिष्ठ ने बताया कि बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा मिले तथा साथ ही उनमें आगे बढ़ने की प्रेरणा व प्रोत्साहन मिले इसके लिए जिला स्तर पर अनेक गतिविधियों का आयोजन करवाया जा रहा है। इससे बच्चों में मानसिक एवं शारीरिक विकास अधिक वृद्धि से होगा।
बताया कि सभी प्राथमिक शिक्षकों को छह दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा चुका है। स्कूलों में सराहनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहन के लिए सम्मानित भी किया जा रहा है। बच्चों को गिनती, पहाड़े, सुलेख, प्रतियोगिता से प्रेरित किया जा रहा है। ये गतिविधियां शिक्षक क्षमता निर्माण, उच्च गुणवत्ता और विविध छात्र और शिक्षक संसाधन, लर्निंग सामग्री का विकास और सीखने के परिणामों को प्राप्त करने में प्रत्येक बच्चे की प्रगति पर नजर रखने के लिए है। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को इस वर्ष 60 प्रतिशत बच्चे निपुण बनाने का लक्ष्य दिया गया है।
मूलभूत भाषा और साक्षरता के मुख्य घटक
रीडिंग कंप्रीहेंशन, प्रिंट के बारे में अवधारणा, शब्दावली, मौखिक भाषा का विकास, लेखन, डिकोडिंग, ध्वनि के माध्यम से जागरूकता, पढ़ने की संस्कृति, पढ़ने का प्रभाव। प्रारंभिक गणित के मुख्य घटक नंबर एंड ऑपरेशन ऑन नंबर, पैटर्न, आकार एवं स्थानिक समझ, डाटा संधारण, माप-तोल, गणितीय संचार, फ्री नंबर अवधारणा आदि हैं।