21जेएनडी06-राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला में बनाया गया रानी तालाब का चित्र। स्रोत विवि
जींद। अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती वर्ष पर चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय और संस्कार भारती हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला का समापन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर घनश्याम दास और सुखेंद्र कुमार ने शिरकत की।
इसकी अध्यक्षता कुलसचिव प्रो. लवलीन मोहन ने की। कार्यक्रम संयोजक डॉ. विजय कुमार ने कार्यों के बारे में विस्तृत रूप से वर्णन किया। मुख्यवक्ता घनश्याम दास ने कहा कि भारत के ऐतिहासिक खंड में लोकमाता अहिल्याबाई का योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने अपने जीवन में अनेक चुनौतियों का सामना किया। उनके पति कुंवर मल्हारराव होल्कर की मृत्यु के बाद भी उन्होंने धैर्य बनाए रखा और मल्हार राव के साम्राज्य को मजबूत किया। उनका शासन न्यायप्रिय और धर्मनिष्ठ था, जिसके कारण उन्हें प्रजा का अपार प्रेम और सम्मान मिला, उन्होंने इंदौर नगर की स्थापना की। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने कई मंदिरों और धर्मस्थलों का पुनर्निर्माण और निर्माण करवाया, जिनमें काशी, उज्जैन और द्वारका के प्रमुख मंदिर शामिल हैं। कुलसचिव प्रो. लवलीन मोहन ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई ने साहस और धैर्य, न्याय, सदाचार, शिक्षा, समाज सुधार, कला, संस्कृति का संरक्षण करने के साथ सभी के लिए समान कार्य किए। उन्होंने न सिर्फ समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ाया, बल्कि अपने राज्य की सीमाओं को भी सुरक्षित किया।