पांच महीने पहले हत्या के बाद दफनाया शव मिलने से कई राज से पर्दा उठ गया है। सुरेश की हत्या के बाद उसकी पत्नी सुनीता खुद को बचाने के लिए परिवारों को गुमराह करती रही। हत्या के नौ दिन बाद 20 अप्रैल को वह अपने मायके बड़ेसरा चली गई। इसके बाद गुरुग्राम से अपना सामान लेकर भिवानी में रहने लगी। वहीं सुनीता ने बच्चे के इलाज के नाम पर भी परिजनों से रुपये ऐंठे हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि सुरेश को जींद निवासी मनोज व डूमरखां निवासी सुखबीर ने एक-एक गोली मारी थी। मनोज को सुखबीर के साथ सुनीता के लंबे समय से चल रहे अवैध संबंधों के बारे में पहले से पता था। वह अक्सर दोनों के साथ ढाबे पर ही रहता था। मनोज और मृतक की पत्नी अब गिरफ्तार नहीं हुए हैं। वहीं, शुक्रवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी सुखबीर को गिरफ्तार किया था। शनिवार को पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे पांच दिन के रिमांड पर भेज दिया।
पुलिस के अनुसार जब सुनीता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकाली तो इस पर प्रतिदिन 30 मिनट से एक घंटे तक डूमरखां निवासी सुखबीर उर्फ सुखी के साथ संपर्क पाया। इस पर पुलिस ने सुनीता के फोन से सुखबीर को लगभग दस से 12 बार कॉल की, लेकिन सुखबीर ने कॉल नहीं उठाई। इसके बाद दूसरे नंबर से कॉल कर पुलिस ने सुखबीर को थाने में बुलाया। इसमें सुखबीर ने पुलिस को एक बार भी यह नहीं पूछा कि वह किस अपराध में उसे बुला रहे हैं। वहीं सुरेश की हत्या में डूमरखां निवासी सुखबीर उर्फ सुखी के अलावा जींद निवासी मनोज भी शामिल था। दोनों ने सुरेश को एक-एक गोली मारी थी।
जिसे चलानी सिखाई कार, उसी ने लगा दिया जिंदगी पर ब्रेक
सुनीता दसवीं कक्षा में पढ़ते समय जींद की शिव कॉलोनी में रहती थी। तब सुरेश कार रिपेयरिंग का काम सीखता था। किसी दोस्त के माध्यम से सुनीता और सुरेश की जान-पहचान करीब सात साल पहले हुई थी। इसके बाद उनकी मुलाकात बढ़ती गई और सुनीता ने सुरेश से कार चलाना सिखाने को कहा। इस पर सुरेश ने उसको कार सिखा दी। इस दौरान सुनीता का पता चला कि सुरेश के पास गांव में अच्छी जमीन जायदाद है तो सुनीता ने सुरेश के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। इसके बाद दोनों के परिवार वालों ने उनकी शादी करवा दी। परिजनों ने बताया कि सुरेश ने सुनीता को कार चलानी सिखाई थी। अब उसी सुनीता ने सुरेश के जीवन पर ब्रेक लगा दिए।
सुनीता के पास अक्सर बाहरी लोगों का था आना जाना
सुनीता के ससुर राममेहर ने बताया कि सुनीता शादी के कुछ दिन बाद तक गांव में रही थी। वहां पर उनके पास अक्सर बाहरी लोग आते थे। इस पर जब उनसे पूछा जाता तो उनको अपने रिश्तेदार बताकर कई-कई घंटे तक घर पर रखती तो कभी उनके साथ गाड़ी में बैठकर बाहर भी चली जाती।
शिक्षा व नौकरी के नाम पर करती रही गुमराह
सुरेश खुद आठवीं पास था और घर में कोई पढ़ा-लिखा नहीं था। सुनीता अक्सर घर से कभी परीक्षा देने तो कभी परीक्षा की तैयारी के लिए घर से कई-कई दिन बाहर रहती थी। कभी नौकरी लगने के लिए पैसे तो कभी किसी कोर्स में दाखिला लेने के लिए घर से पैसे लेती थी। परिजनों को उसकी हरकत पर कभी कोई शक नहीं हुआ। इसी तरह धीरे-धीरे नौ वर्ष में सुरेश की लगभग 22 एकड़ जमीन बिकवा दी।
लॉकडाउन के चलते भी दबा रहा हत्या का राज
सुरेश की हत्या लॉकडाउन के दौरान हुई थी। उस समय रोडवेज से लेकर आम वाहन तक सभी पूर्ण रूप से बंद थे। इस कारण सुरेश की हत्या का राज दबा रहा। सुरेश के परिजनों ने दो से तीन बार गुरुग्राम में जाकर सुरेश के बारे में पूछताछ करनी चाही। इनको एक बार तो पुलिस ने रोहतक से वापस भेज दिया, जबकि दो बार गुरुग्राम पुलिस ने बार्डर से वापस कर दिया। जब सुनीता से फोन पर पूछताछ की तो सुनीता हर बार परिजनों को गुमराह करती रही। लॉकडाउन खुलने के बाद ही सुरेश के परिजनों ने इस मामले में आगे बढ़कर खुलासा करवाने का अवसर मिला।
गांव के सरपंच की होशियारी से खुला हत्या का राज
जब गांव के सरपंच नरेश चहल को सुरेश के लापता होने के बारे में पता चला तो उन्होंने बार बार परिजनों को सुनीता से पूछताछ के लिए मजबूर किया। इसके बाद सुरेश के परिजनों ने सरपंच से परेशान होकर उसके साथ बोलना भी बंद कर दिया, लेकिन सरपंच के मन में सुरेश के लापता होने का दुख था। इसके बाद भी उन्होंने उनके परिवार द्वारा उनके साथ किये बर्ताव की चिंता नहीं की और अन्य ग्रामीणों के माध्यम से पुलिस को शिकायत देने का दबाव बनाया। इसमें सुनीता ने परिवार वालों को शिकायत देने से भी रोकने की कोशिश की, लेकिन सरपंच के रवैये के कारण शिकायत देकर मामले को सुलझवाया गया।
सुखबीर के साथ चली गई थी सुनीता
करीब एक साल पहले सुनीता सुरेश को छोड़कर सुखबीर के साथ रहने लगी थी। करीब एक महीना दोनों साथ रहे और इसके बाद सुखबीर के परिजन पंचायत कर उसे सुरेश के परिजनों को सौंप गए थे। साथ ही इन लोगों ने यह भी आश्वासन दिया था कि भविष्य में सुखबीर सुनीता से नहीं मिलेगा। इसको आधार बनाकर ही सुनीता ने सुरेश को गुरुग्राम रहने को कहा था।
सुरेश की हत्या के आरोप में पुलिस ने सुखबीर उर्फ सुखा को अदालत में पेश किया, जहां से उसे पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। इस दौरान सुखबीर से पूछताछ की जाएगी। फिलहाल सुनीता को गिरफ्तार नहीं किया गया है। साथ ही मनोज की गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस छापेमारी कर रही है।
राजेंद्र सिंह, थाना प्रभारी, सेक्टर पांच, गुरुग्राम।
फोटो कैप्शन
05जेएनडी03: सुरेश और सुनीता अपने बच्चे के साथ।
05जेएनडी19: सुरेश के घर पर बैठे परिवार के लोग।