जींद। कटाई का सीजन शुरू होते ही धान की पराली जलाने के मामले बढ़ने लगे हैं। अब तक जिले में पराली जलाने के 33 मामले सामने आ चुके हैं। इसके साथ ही जिले में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है। हालांकि पिछले सप्ताह हुई बूंदाबांदी के बाद प्रदूषण का स्तर काफी घटा था, लेकिन अब फिर से बढ़ने लगा है। वीरवार को प्रदूषण का स्तर 200 एक्यूआई दर्ज किया गया।
जिले में अकसर प्रदूषण का स्तर खराब रहता है। ऐसे में अब पराली जलाने के मामलों के बढ़ने से प्रदूषण और अधिक बढ़ने की आशंका है। फिलहाल प्रदूषण का स्तर खराब स्थिति में जा चुका है। यदि यह इससे अधिक बढ़ता है तो स्थिति गंभीर होगी। ऐसे में लोग अधिक बीमार हो सकते हैं। आने वाले समय में प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ने की आशंका है।
प्रदूषण का स्तर
तारीख एक्यूआई
15 अक्तूबर 222
16 अक्तूबर 268
17 अक्तूबर 269
18 अक्तूबर 47
19 अक्तूबर 64
20 अक्तूबर 268
21 अक्तूबर 204
एक्यूआई के अनुसार प्रदूषण के मानक
0-50 अच्छा
51-100 संतोषजनक
101-200 औसत
201-300 खराब
301-400 बहुत खराब
401-500 गंभीर
पिछले साल भी बढ़े थे पराली जलाने के मामले
हालांकि पिछले कई सालों से प्रशासन व सरकार धान की पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरूक कर रहे हैं। बावजूद इसके पिछले साल पराली जलाने के मामले बढ़े थे। पिछले साल जिले में कुल 1004 मामले आए थे। हालांकि उससे पहले वर्ष 694 मामले आए थे। इस साल में अभी तक 33 मामले सामने आ चुके हैं।
मौसम के कारण भी बढ़ता है प्रदूषण
ठंड शुरू होने के साथ प्रदूषण का स्तर वैसे भी बढ़ता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ राजेंद्र शर्मा के अनुसार सुबह-शाम के समय ठंड बढ़ने से हवा में मौजूद प्रदूषण के कण एक साथ जुड़ जाते हैं। इससे प्रदूषण बढ़ जाता है।
विकास कार्यों में लापरवाही बढ़ा रही मर्ज
बेशक धान की पराली जलाने से धुआं होता है, लेकिन इससे अलावा भी जींद में प्रदूषण का स्तर कई बार अधिकतम स्तर 500 एक्यूआई तक पहुंच चुका है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी मानते हैं कि कई अन्य कारक भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। इसमें सबसे अधिक प्रभाव विकास कार्यों में बरती जाने वाली लापरवाही है। विकास कार्यों में धूल-मिट्टी का प्रबंधन नहीं किया जाता। इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है।
पांच एकड़ से अधिक की पराली जलाने पर 15 हजार जुर्माने का प्रावधान
वहीं धान की पराली जलाने से रोकने के लिए सरकार जुर्माने का प्रावधान किया है। इसके तहत दो एकड़ तक की पराली जलाने पर दो हजार रुपये, पांच एकड़ तक पर पांच हजार रुपये इससे अधिक पराली जलाने पर 15 हजार रुपये जुर्माना किया जाता है।
कृषि उप निदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक ने बताया कि कृषि विभाग को सैटेलाइट से उन स्थानों की जानकारी मिलती है, जहां धान की पराली जलाई जाती है। इसके बाद विभाग के व्यक्ति मौके पर पहुंच कर इसकी जांच करते हैं। इसके बाद किसान को नोटिस दिए जाते हैं।