जींद जिले के उचाना हलका के गांव सफाखेड़ी, उचाना खुर्द, दरोली खेड़ा, हसनपुर गांव के बाद अब गुरुकुल खेड़ा गांव में हुई भाईचारे की पंचायत में सर्वसम्मति से साधुराम के नाम पर सरपंच पद के लिए सहमति बनी। मंगलवार को गांव में हुई पंचायत में सभी समाज के लोगों ने शामिल होकर साधुराम के नाम पर हाथ उठा कर इस पर अपनी सहमति जताई। इस तरह की भाईचारे की पंचायत में सरपंच पद को लेकर सहमति से इन गांवों से भाईचारे का संदेश उचाना ही नहीं बल्कि प्रदेश के हर गांव में जा रहा है।
गुरुकुल खेड़ा गांव में 20 साल के बाद सर्वसम्मति सरपंच पद के नाम को लेकर बनी है। पंचायत में फैसला लिया गया कि सरपंच पद के नाम को लेकर एक ही नामांकन गांव की तरफ से होगा। निवर्तमान सरपंच सुरेंद्र ने बताया कि सरपंच पद के नाम पर सहमति होना भाईचारा का प्रतीक है।
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इस तरह की भाईचारे की पंचायतों से भाईचारे का संदेश पूरे प्रदेश में जाता है। चुनाव के दौरान आपस में मनमुटाव तक हो जाते है जो सदियों तक चलते रहते है। सर्वसम्मति से जहां चुनाव को लेकर होने वाला उम्मीदवारों का खर्च बचता है तो भाईचारा भी गांव में कायम रहता है।
साधुराम ने कहा कि जो गांव की हर बिरादरी द्वारा सरपंच पद को लेकर उनके नाम पर सहमति जताई है उस विश्वास को वो हमेशा कायम रखेंगे। गांव में बिना किसी भेदभाव के सबकी सहमति से विकास कार्य करवाएंगे। गांव ने जो फैसला लेकर भाईचारे की मिशाल कायम की है उसका वो ताउम्र आभारी रहेंगे।
इस अवसर पर करसिंधु गांव से रामफल, पाला, वजीर, चुडिय़ा, भज्जा, सूबा प्रधान, पूर्व सरपंच राजेंद्र, पूर्व सरपंच तेलू, निवर्तमान सरपंच सुरेंद्र, सूरजमल, रामचंद्र, ऋषिया नंबरदार, सुभाष नंबरदार, दिलबाग, सुखबीर, पप्पू, धोला, भान सैन, ऋषिपाल चौहान, कर्मबीर भौंसले, रामफल खटकड़, सतपाल एलबीओ, गुलाबा, दिलबाग धानक, सुरेश वाल्मीकि, बलबीर जीत, मिक्कड़, संदीप, नवीन, भूरिया, अमरी, सोनू व महाबीर आदि मौजूद रहे।