जींद। घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए अधिवक्ता पूजा जांगड़ा अदालत में सहारा बनी हुई है। पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलवाने के लिए वह बिना किसी झिझक के इन महिलाओं की पैरवी करती है, ताकि उनको न्याय दिलवा सके। अब तक 15 महिलाओं के मुकद्में निशुल्क लड़ चुकी हैं।
वर्ष 2018 से अदालत में प्रैक्टिस कर रहीं पूजा जांगड़ा पिछले तीन साल से जरूरतमंद पीड़ित महिलाओं का सहारा बनी हुई है। अधिवक्ता पूजा पीड़ित महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर महिलाओं को जागरूक भी कर रही हैं। उनके पास इस तरह के जो मामले आते हैं, उन महिलाओं को पहले परिवार के साथ तालमेल सही करने को लेकर समझाने का प्रयास किया जाता है।
इसके बाद भी अगर परिवार के लोगों की प्रताड़ना कम नहीं होती तो वह महिलाओं की अदालत में पैरवी के लिए आगे आती है। परिवार से दूर होने के बाद अधिकतर महिलाओं के पास अदालत में लड़ाई लड़ने के लिए फीस नहीं होती। इसके कारण महिलाओं पर प्रताड़ना लगातार बढ़ती जाती है।
इसको देखते हुए उन्होंने अभ्यास के बाद निर्णय लिया कि महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को रुकवाने के लिए उनकी सहायता करेगी। इसके चलते जो भी महिला उनके पास घरेलू हिंसा के मामले लेकर आती है। इसमें वह फीस देने में असमर्थता जताती है तो अधिवक्ता पूजा जांगड़ा उनके साथ खड़ी होती है।
पूजा जांगड़ा का कहना है कि समाज में प्रत्येक अधिवक्ता को जरूरतमंद की सहायता करनी चाहिए। अधिवक्ता को पेशे से दूर हटकर खुद को सामाजिक भी बनाना चाहिए, ताकि उनकी कानूनी सहायता से जरूरमंदों को न्याय मिल सके।