जिला परिषद की मीटिंग रद्द होने के बाद बाहर निकलते पार्षद।
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जिला परिषद के विशेष सत्र के दूसरे दिन की बैठक को रद्द करना पड़ा। चेयरपर्सन प्रवीण देवी घणघस ने सत्र शुरू होते ही इसको रद्द करने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जिला परिषद के विकास कार्यों और बजट आवंटन पर रोक लगाई हुई है। जब तक यह रोक नहीं हटाई जाती है बैठक का कोई औचित्य नहीं बनता। हालांकि इस फैसले से कई पार्षद नाराज नजर आए। पार्षदों का कहना है कि विकास कार्यों पर अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाती। गौरतलब है कि वीरवार के सत्र में अधिकारी नहीं पहुंचे थे। इसके बाद शुक्रवार को सभी अधिकारी बैठक में पहुंचे, लेकिन सत्र रद्द हो गया।
चेयरपर्सन प्रवीण देवी घणघस के अनुसार पिछले छह माह से जिला परिषद के विकास कार्यों पर सरकार द्वारा रोक लगाई गई है। ऐसे में करीब आठ करोड़ रुपये की ग्रांट विकास कार्यों पर खर्च नहीं हो पा रही है। करीब ढाई महीने पहले जिप की मीटिंग में ग्रांट वितरण का प्रस्ताव पास हो चुका है, सरकार विकास में बाधा बन रही है।
राजनीतिक पेंच
जिला परिषद के विकास कार्यों पर राजनीतिक पेंच फंसा हुआ है। दरअसल चेयरपर्सन प्रवीण देवी घणघस व उनके पति नरेंद्र घणघस भाजपा के नेता हैं और ग्रामीण विकास का मंत्रालय जजपा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पास है। ऐसे में नरेंद्र घणघस पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि दुष्यंत चौटाला ने ही विकास कार्यों पर रोक लगाई है। हालांकि शुक्रवार को नरेंद्र घणघस ने कहा कि चेयरपर्सन के चुनाव में दुष्यंत चौटाला ने उनकी मदद की है और वे दुष्यंत चौटाला का सम्मान करते हैं। ऐसे में जींद के विकास में रोक नहीं आनी चाहिए।
भाजपा-जजपा का विकास विरोध चेहरा बेनकाब
भाजपा समर्थक चेयरपर्सन प्रवीण देवी घणघस उपमुख्यमंत्री पर विकास कार्य रोकने का आरोप लगा रही हैं। जबकि सरकार भाजपा की भी है। ऐसे में बड़े नेताओं से मिलकर अवरोध दूर किया जा सकता है। फैसला यह हुआ है कि सभी वार्डों में बराबर ग्रांट वितरित हो। इसके बावजूद भी ग्रांट वितरित नहीं होना भाजपा-जजपा का विकास विरोधी चेहरा दिखा रहा है। अनुदान राशि कमीशन के चक्कर में रोकी जा रही है। कुछ लोग कमीशन चाहते हैं।
अमित निडानी उर्फ मित्ती, जिला पार्षद।
जल्द होगा आंदोलन
इस दौरान पार्षद सत्तू संगतपुरा व अमित निडानी ने कहा कि ग्रांट वितरित नहीं होना पार्षदों के हकों पर डाका है। वार्ड के लोग जवाब मांगते हैं। पांच साल से राजनीति चल रही है। ऐसे में अब बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इसमें डीआरडीए के गेट को ताला लगाने से लेकर सामूहिक इस्तीफे तक हो सकते हैं।