जींद। अप्रैल से अब तक आई तेज आंधी में बिजली निगम के 4,865 खंभे टूटने के बाद स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। खंभों की कमी के कारण खेतों की बिजली लाइनें बहाल नहीं हो सकी हैं, जिससे धान की बुवाई प्रभावित हो रही है। किसान लगातार निगम कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं और समाधान शिविरों में शिकायतें दर्ज करा रहे हैं लेकिन पर्याप्त खंभे उपलब्ध न होने से समस्या जस की तस बनी हुई है।
सोमवार को आलन जोगी खेड़ा गांव के किसान कृष्ण और सुरेश लघु सचिवालय में आयोजित समाधान शिविर में पहुंचे। उन्होंने डीसी डॉ. वैशाली शर्मा को शिकायत देकर जल्द खेतों मेंं बिजली ठीक करने की मांग की।
इस पर डीसी ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया। साथ ही डीसी ने बिजली विभाग को किसानों की समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए। कहा कि किसानों को किसी भी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े। खेतों की बिजली जल्द दुरुस्त कराई जाए।
बिजली निगम के आंकड़ों के अनुसार, दो माह में नौ मीटर ऊंचे 4439 खंभे और 11 मीटर ऊंचे 427 खंभे टूट चुके हैं। नौ मीटर ऊंचे खंभों की सबसे अधिक आवश्यकता है लेकिन अब तक 250 खंभे ही मिल पाए हैं, जबकि दो हजार से अधिक खंभों की मांग मुख्यालय को भेजी गई है। वहीं, 11 मीटर ऊंचे खंभों का स्टॉक मात्र 40 रह गया है। इससे हजारों किसानों के खेतों की बिजली आपूर्ति बाधित है।
यदि मानसून की सक्रिय बारिश शुरू हो गई तो खेतों तक खंभे पहुंचाना और उन्हें लगाना और भी मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में जिले के हजारों किसानों की धान की फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
एसडीओ और एक्सईएन कार्यालय में दी शिकायत लेकिन नए खंभे नहीं लगाए गए
समाधान शिविर में पहुंचे आलन जोगी खेड़ा गांव के किसान कृष्ण और सुरेश ने बताया कि अप्रैल में आई तेज आंधी में उनके खेतों में लगे बिजली के खंभे टूट गए थे। कई बार शिकायत देने के बावजूद अब तक मरम्मत नहीं हुई है। उन्होंने लाखों रुपये में जमीन ठेके पर ली है लेकिन बिजली आपूर्ति ठप होने से धान की पौध तैयार नहीं हो पा रही।
दो माह से निगम कार्यालयों के चक्कर काट रहे लोग
तेलीखेड़ा गांव के किसान रणबीर और धर्मबीर ने बताया कि वे दो माह से निगम कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। यदि जल्द खंभे नहीं मिले तो बरसात शुरू होने के बाद खेतों में भारी खंभे पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में धान की फसल लगाने में और देरी होगी जिसका सीधा असर उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ेगा। किसानों का आरोप है कि बिजली निगम की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। समय पर बिजली लाइनें दुरुस्त न होने से कई किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
वर्जन
खेतों में खेतों में बिजली लाइन दुरुस्त करवाने के लिए 80 कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित की हुई है। यह इस काम पर लगे हुए हैं। जून माह में इस काम को पूरा कर दिया जाएगा, जरूरत के अनुसार खंभे साथ के साथ मंगवाए जा रहे हैं।
-विनोद कुमार, एसई बिजली निगम