जींद। हांसी रोड पर नगर परिषद की डंपिंग साइट को ग्रीन बफर जोन बनाने की योजना फिलहाल लटक गई है। इस जमीन पर वन विभाग को 1500 पौधे लगाने थे। इसके लिए नगर परिषद ने वन विभाग को 15 लाख 43 हजार रुपये भी दे दिए थे, लेकिन पीएलए (पर्सन लेजर अकाउंट) नहीं खुल पाया, जिसकी वजह से यह राशि वन विभाग ने नगर परिषद को लौटा दी है। अब इस योजना पर दोबारा विचार होगा। यदि योजना सिरे चढ़ी तो हांसी रोड पर डंपिंग साइट से उठने वाली बदबू से काफी हद तक छुटकारा मिल जाएगा।
नगर परिषद ने हांसी रोड पर डंपिंग पॉइंट बना रखा है। यहां पर शहर से एकत्रित किए गए कूड़े को डाला जाता है। यहां पर लगभग 15 एकड़ में ठोस कचरा डंपिंग साइट है। शहर से हर रोज निकलने वाले 200 टन से ज्यादा ठोस कचरे को इसी साइट पर डाला जाता है। शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर इस साइट पर पड़ी गंदगी काफी प्रभाव डालती है। इस कारण शहर की स्वच्छता रैंकिंग भी गिरती है।
गत दिनों जब देश के सभी शहरों की स्वच्छता रैंकिंग जारी की गई थी, तब जींद की स्वच्छता रैंकिंग पिछले साल के मुकाबले कई अंक लुढ़क गई थी। इसके लिए हांसी रोड पर नगरपरिषद के ठोस कचरा डंपिंग जोन को भी एक बड़ा कारण माना गया था। नगर परिषद प्रशासन ने हांसी रोड पर अपनी डंपिंग साइट को ग्रीन बफर जोन बनाने की योजना पिछले साल बनाई थी।
26 सितंबर 2023 को नगर परिषद प्रशासन ने वन विभाग के पास 15 लाख 43 हजार रुपये की राशि जमा करवाई थी। इस राशि से वन विभाग को डंपिंग साइट पर जामुन, शीशम, नीम, अर्जुन, हाथीफल, गुलमोहर, बांस, जमोआ, शहतूत समेत कई प्रकार के लगभग 1500 पौधे लगाने थे। यहां वन विभाग को पौधे लगाने के बाद 31 मार्च 2026 तक उनकी देखरेख भी करनी थी।
इस पूरी कवायद पर 15 लाख 43 हजार से ज्यादा की राशि खर्च होनी थी। यह सारा पैसा नगर परिषद ने वन विभाग के पास जमा कर दिया था, लेकिन ट्रेजरी में पीएलए नहीं खुलने के कारण यह पैसा नगर परिषद को लौटा दिया गया। इसी कारण यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। अब दोबारा से इस योजना पर विचार किया जाएगा।