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रोडवेज बनी शिक्षा में बाधा, रोडवेज बस चालकों की मनमानी के कारण तीन महीने से छात्राएं नहीं पहुंच पा रही कालेज

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रोडवेज बस चालकों की मनमानी से तीन महीने से परेशान हैं छात्राएं
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अमर उजाला ब्यूरो
सफीदों। रोडवेज द्वारा हर गांव के लोकल रूटों पर बस बंद कर दिए जाने के कारण कॉलेज में पढ़ने आने वाली छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस परेशानी को लेकर सोमवार को गांव डिडवाड़ा, बड़ौद व भुसलाना की करीब 35 छात्राओं ने विधायक जसबीर देशवाल के भाई को ज्ञापन सौंपकर बस चलवाने की मांग की। विधायक जसबीर देशवाल के भाई रणबीर ने छात्राओं को भरोसा दिया की जल्द ही उनके गांवों में सरकारी बस की सेवाएं शुरू करवाई जाएगी। छात्रा नेहा, सीमा, रजनी, ऊषा, कविता ने कहा कि वह सरला महिला महाविद्यालय सफीदों में करीब 13 किलोमीटर दूर से पढ़ाई करने के लिए आती हैं। पिछले तीन माह से उनके गांव की ओर सरकारी बस नहीं चलने के कारण वह समय पर कालेज नहीं पहुंच पा रही है। नवंबर माह से उनके गांवों में सरकारी बस नहीं गई। इसकी शिकायत एसडीएम कार्यालय व बस स्टैंड सफीदों में दी, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया। छात्राओं ने बताया कि गांवों में बस बंद होने से प्रतिदिन 20 रुपये का खर्च ऑटो रिक्शा पर होता है, जबकि सरकारी बस में वह निशुल्क सफर करती थी। आटो समय पर नहीं चलते इसके कारण वह प्रतिदिन कालेज में देरी से पहुंचती हैं। इसके कारण उनकी शिक्षा खराब होती जा रही है।
सरकारी बस बंद होने से हर रोज कालेज में गैर हाजिरी लग रही है। इससे कालेज से नाम कटने की नौबत कई बार लड़कियों को आई है। आटो से 20 रुपये का प्रतिदिन किराया भी संभव नहीं है।
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छात्रा निशा गांव डिडवाड़ा
आटो का किराया देने में असमर्थ छात्राएं कई दिनों से कालेज नहीं गई। इसका असर उन्हें परीक्षा परिणाम में भुगतना पड़ेगा। कालेज में छह गैरहाजिरी के बाद नाम काट दिया जाता है। गांवों में सरकारी बस नहीं आने से कई छात्राओं पर नाम कटने की तलवार लटक रही है।
बीए फाइनल छात्रा मंजू,
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