धान की खरीद नहीं होने पर परेशान किसानों ने मंडी गेट पर जड़ा ताला, रेलवे रोड किया जाम
अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना। भले ही सरकार एक अक्तूबर से धान की खरीद का दावा कर रही है, लेकिन दस दिन बाद भी धान बेचने के लिए किसानों को आंदोलन करना पड़ रहा है। नरवाना की कपास मंडी में पड़ी किसानों की धान की खरीद नहीं होने से परेशान किसानों ने बुधवार दोपहर बाद कपास मंडी के गेट पर ताला जड़ दिया। इसके बाद किसान पुरानी अनाज मंडी में पहुंच गए और रेलवे रोड पर जाम लगा कर धान की फसल की खरीद कार्य शुरू करने की मांग की। किसानों ने कपास मंडी से लेकर पुरानी अनाज मंडी तक रोष प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से उनकी धान कपास मंडी में पड़ी है, लेकिन खरीद के लिए कोई अधिकारी मंडी में नहीं पहुंचा। जिस कारण मंडी में अब धान डालने के लिए जगह नहीं बची और किसानों को मंडी से बाहर अपनी धान डालनी पड़ रही है। किसानों द्वारा आंदोलन किए जाने पर अधिकारी हरकत में आए और धान की खरीद शुरू करवाई। इसके बाद किसान मंडी में अपनी-अपनी धान की ढेरियों के पास लौट गए।
सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए किसानों ने कहा कि एक तरफ तो सरकार अपने आपको किसान हितैषी बता रही है और दूसरी तरफ यहां सीजन में उनकी धान खरीदने के लिए कोई नहीं आता। जाम की सूचना मिलते ही शहर थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों को समझा बुझा कर जाम खुलवाया। किसानों ने कहा कि अगर जल्द खरीद शुरू नहीं हुई तो किसान दोबारा सड़कों पर बैठने को मजबूर होंगे। वहीं शहर में जाम लगने के कारण आज जन को आधे घंटे तक परेशानियों का सामना करना पड़ा। किसानों द्वारा जाम लगाने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और धान खरीद कार्य शुरू होने का आश्वासन दिया।
85 हजार क्विंटल धान की हुई खरीद
मार्केट कमेटी के सचिव ओमप्रकाश जांगड़ा के अनुसार इस सीजन में बुधवार तक 85 हजार क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है। पिछले साल दस अक्तूबर तक 80 हजार क्विंटल धान की आवक हुई थी। जांगड़ा के अनुसार पहले पुरानी मंडी में खरीद होती है और दोपहरबाद कपास मंडी में धान की खरीद की जाती है। इसके चलते ही किसानों ने आंदोलन किया है।
नरवाना की सभी मंडियों में एफसीआई की खरीद है। कपास मंडी में भी धान की खरीद का कार्य शुरू हो चुका है। इसकी सूचना मिलते ही किसान मंडी में अपनी धान की ढेरियों के पास पहुंचे। किसानों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
-भीम सिंह मीणा, प्रबंधक एफसीआई