अमर उजाला ब्यूरो
जींद। आल फूड एंड अलाइटेड लोडिंग-अनलोडिंग मजदूर यूनियन ने वीरवार को हैफेड, फूड सप्लाई, वेयर हाउस और हरियाणा एग्रो फूड एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाकर कटघरे में खड़ा कर दिया है। मजदूरों ने जिला प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में कहा कि सभी एजेंसियों के अधिकारी मजदूरों के खाते में ईपीएफ नहीं डालकर अपने निजी या फिर रिश्तेदारों के खातों में मजदूरी के नाम का ईपीएफ डाल रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि वे पिछले करीब 27 साल से इन एजेंसियों के माध्यम से मंडियों में लोडिंग और अनलोडिंग का काम कर रहे हैं, लेकिन आज तक ठेकेदारों ने किसी भी मजदूर का न तो इंश्योरेंस करवाया है और न ही एएसआई काटा है।
इस मजदूर यूनियन के सदस्यों ने मंगलवार को सिटीएम सत्यवान सिंह मान को अपनी शिकायत देकर आए और शीघ्र ठेकेदारों द्वारा मजदूरों के साथ की जा रही इस लूटमार को बंद करवाने की गुहार लगाई। इस मजदूर यूनियन ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपनी शिकायत लिखकर प्रति वर्ष ईपीएफ, एएसआई और इंश्योरेंस के नाम पर हो रही लूट की जांच करवाकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों पर खुद के लाइसेंस नहीं होने के बाद भी मंडियों में भारी मात्रा में अनाज की खरीद कर रहे हैं, लेकिन इन मजदूरों को न तो कभी समय पर पैसे दिए जा रहे और न ही इनके खाते में कभी ईपीएफ और एएसआई के पैसे डलवाए जा रहे। इसके कारण इन मजदूरों का प्रति वर्ष शोषण मंडियों में किया जा रहा है।
रजिस्टर्ड हैं 1750 मजदूर
जिले में आल फूड एंड अलाइटेड लोडिंग अनलोडिंग मजदूर यूनियन के लगभग 1750 मजदूर रजिस्टर्ड हैं। इन रजिस्टर्ड मजदूरों में से लगभग 200 मजदूरों को ही नियमों के अनुसार ईपीएफ, एएसआई और इंश्योरेंस की सुविधाएं मिल रही हैं। इनमें से बाकी के मजदूरों को किसी भी प्रकार की नियमों के अनुसार सुविधा नहीं मिल रही हैं।
हाजिरी रजिस्टर भी नहीं
मजदूरों ने पीएम को लिखी चिट्ठी में अपनी तमाम असुविधाओं को उजागर करते हुए लिखा है कि इन मजदूरों के लिए कोई हाजिरी रजिस्टर्ड है, और न ही गेट पास और न ही कभी समय पर वेतन मिलता। इन सभी असुविधाओं के चलते ठेकेदार उनसे जबरदस्ती रविवार के दिन भी बिना किसी वेतन के काम करवा रहे हैं।
अधिकारी नहीं करते सुनवाई
मजदूरों ने अपनी तमाम परेशानियों का चिट्ठी में बखान करते हुए कहा कि इन सभी मजदूरों ने कई बार अधिकारियों से भी शिकायत की लेकिन अधिकारी ठेकेदार के साथ मिलकर उन मजदूरों को धमकी देकर उनकी आवाज को दबाने का काम करते हैं।
प्रतिदिन मंडी में काम करते 150 मजदूर, रिकार्ड में दिखाए जाते 30 से 35
शिकायतकर्ताओं ने कहा कि मंडी में प्रतिदिन 150 मजदूर काम करते हैं, लेकिन ठेकेदारों के फर्जी रिकार्ड में 30 से 35 की संख्या ही काम करती दिखलाई जाती है। इसके कारण मजदूरों को मिलने वाली सुविधाओं से वह मजदूर वंचित रह जाते हैं। जो पिछले कई वर्षो में मंडियों में लोडिंग और अनलोडिंग का काम करते हैं।
मामला गंभीर है
मजदूरों ने तमाम शिकायत करते हुए ज्ञापन सौंपा है। यह सभी मामले बेहद गंभीर हैं। प्रशासन की जानकारी में यह सब आया है। इसकी जांच की जाएगी। यदि कोई भी व्यक्ति इसमें दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सत्यवान मान, सिटीएम