जींद। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में अब ग्राम पंचायतों की भूमिका बढ़ाई जा रही है। सरकार की नई नीति के तहत पंचायतें अब गांवों में पेयजल आपूर्ति के संचालन, रखरखाव और प्रबंधन का जिम्मा स्वयं संभालेंगी।
जींद जिले में इस योजना के तहत 16 ग्राम पंचायतों को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें खुंगा गांव में प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी उपायुक्तों के साथ समीक्षा बैठक की।
जींद में उपायुक्त मोहमद इमराज रजा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। डीसी ने बताया कि नई नीति के तहत पंचायतों को पेयजल प्रबंधन से जुड़े कई प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं।
चायतें आवश्यकता के अनुसार पानी की दरों में बदलाव कर सकेंगी और अवैध कनेक्शनों को काटने की कार्रवाई भी कर पाएंगी। साथ ही दूषित और अनियमित कनेक्शनों पर जुर्माना लगाने तथा एफआईआर दर्ज करवाने का अधिकार भी समितियों को मिलेगा।
योजना को दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में जिले की 245 एकल ग्राम जल योजना वाली पंचायतों को शामिल किया गया है, जबकि दूसरे चरण में बहु-ग्रामीण पेयजल योजनाओं से जुड़ी 55 पंचायतों को योजना में जोड़ा जाएगा।
नई संचालन नीति के तहत प्रत्येक 500 घरों पर एक महिला को पेयजल कनेक्शन जांचने, पानी के नमूने लेने, बिल जमा करवाने और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी दी जाएगी। 500 से अधिक घर होने पर दो महिलाओं की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
डीसी ने बताया कि जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और पंचायतों के बीच पांच वर्षों के लिए समझौता प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। खुंगा ग्राम पंचायत इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाली हरियाणा की पहली पंचायत बन गई है।
पांच सदस्यीय ग्राम जल एवं सीवरेज समिति का होगा गठन
पंचायत स्तर पर पांच सदस्यीय ग्राम जल एवं सीवरेज समिति का गठन किया जाएगा जिसमें जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कनिष्ठ अभियंता, ग्राम सचिव, पंप संचालक, ऑपरेटर और जागरूक ग्रामीण शामिल होंगे। यही समिति पाइपलाइन मरम्मत, नई लाइन बिछाने और पेयजल आपूर्ति की निगरानी करेगी।