फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आरटीआई संबंधित मामलों की सुनवाई करने जींद पहुंचे सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्मानी

विज्ञापन
विज्ञापन
सूचना न देने पर सूचना आयुक्त ने अधिकारियों को लगाई फटकार
विज्ञापन

--फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों की सूचना नहीं देने पर कार्यकारी अधिकारी और फायर अफसर को फटकार
--सूचना आयुक्त ने पूछा, सूचना मांगने वाले क्यों पूछ रहे हो मंशा, बोले तुरंत प्रभाव से सूचना नहीं दी तो विजिलेंस जांच के लिए भेजेंगे मामला
धर्मवीर निडाना
जींद।
आरटीआई के तहत मांगी कई सूचनाओं में खामियां मिलने के मामलों की सुनवाई राज्य सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्मानी ने मंगलवार को जींद पहुंच कर की। इस दौरान 14 केसों का निपटान कर दिया गया। वहीं समय पर सूचना न देने पर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी और फायर ब्रिगेड अफसर को कड़ी फटकार लगाई। राज्य सूचना आयुक्त ने आदेश दिए जिसने जानकारी मांगी है उसे तुरंत जानकारी मुहैया करवाई जाए, नहीं तो मामले की जांच के लिए वह विजिलेंस को लिख देंगे।
दरअसल आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी के 20 से अधिक ऐसे मामले हैं, जिनमें प्रथम अपील अधिकारी से जवाब नहीं मिला। इस पर सूचना मांगने वालों ने द्वितीय अपील में राज्य सूचना आयुक्त से सूचना के लिए गुहार लगाई है। इन मामलों की सुनवाई के लिए राज्य सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्मानी मंगलवार को जींद पहुंचे। इस दौरान नरवाना रोड निवासी विरेंद्र जांगड़ा द्वारा फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों द्वारा नगर परिषद में काम करवाने और उनको फायर ब्रिगेड से वेतन जारी करने की सूचना पर सुनवाई हुई। विरेंद्र जांगड़ा ने सूचना मांगी है कि कुल कितने कर्मचारी ह,ैं और किन आदेशों के तहत पांच कर्मचारियों को नगर परिषद में लगाया गया है। किस आधार पर इन कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है। गौरतलब है कि फायर ब्रिगेड से नगर परिषद में भेजे गए कर्मचारी फायरमैन के पद पर हैं, लेकिन नगर परिषद में उनसे क्लर्क का काम लिया जा रहा है। विरेंद्र जांगड़ा ने पूछा कि कितने समय से यह कर्मचारी नगर परिषद में काम कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार फायरमैन की वेतन अधिक है और क्लर्क की कम।
विज्ञापन


एक साल बाद पूछा सूचना का उद्देश्य
नरवाना रोड निवासी विरेंद्र जांगड़ा ने पिछले साल अक्तूबर महीने में सूचना के तहत इन कर्मचारियों की जानकारी मांगी थी। इस पर एक महीने में सूचना नहीं मिलने पर जब राज्य सूचना आयुक्त के पास अपील की गई तो पिछले महीने राज्य सूचना आयुक्त ने नगर परिषद को इसके लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद नगर परिषद ने विरेंद्र जांगड़ा को पत्र भेज कर सूचना मांगने का उद्देश्य पूछा है।

नहीं पूछ सकते उद्देश्य
इस दौरान राज्य सूचना आयुक्त ने कार्यकारी अधिकारी और फायर ब्रिगेड अफसर से पूछा कि एक साल बाद आप सूचना का उद्देश्य पूछ रहे हैं, किन नियमों के तहत यह पूछा गया है। अधिकारियों ने जवाब दिया, लेकिन राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि प्रार्थी से सूचना का उद्देश्य नहीं पूछा जा सकता। इस पर उन्होंने तुरंत जानकारी देने के आदेश दिए।

एक माह में बताएं कारण बताओ
मामले में राज्य सूचना आयुक्त ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान को समय पर सूचना न देने का करण पूछा है। इसके लिए उन्हें 25 दिसंबर का समय दिया गया है। साथ ही इसी अवधि में सूचना मुहैया करवाने के भी आदेश दिए हैं।

सूचना के लिए दोगुनी फीस
एक अन्य मामले में सुनवाई करते हुए प्रार्थी पूर्व पार्षद श्याम लाल ने कहा कि उससे नगर परिषद ने फीस के तौर पर 60 हजार रुपये लिए। इसके बदले 30 हजार पेज की सूचना दी जानी चाहिए थी। यह राशि नगर परिषद द्वारा ही मांगी गई है। अब उन्हें महज 15 हजार पेश की सूचना दी गई है। श्याल लाल ने कहा कि उन्हें पूरी सूचना दिलवाई जाए और जो देरी हुई है, उसके लिए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस पर राज्य सूचना आयुक्त ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए मामले में उचित कार्रवाई करने के आदेश दिए।
विज्ञापन


मंगलवार को कुल 14 केसों का निपटारा किया गया है। अधिकारियों द्वारा जिन सूचनाओं में देरी की गई है, उनको जल्द मुहैया करवाने के आदेश दिए गए हैं। सूचना मांगने वालों को परेशान करवाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया जाएगा।
भूपेंद्र धर्मानी, राज्य सूचना आयुक्त।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें