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महामहिम राज्यपाल ने जिले के दो शिक्षकों को किया राज्यस्तरीय सम्मान के साथ किया सम्मानित

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राज्यपाल ने जिले के दो शिक्षकों को किया सम्मानित
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। शिक्षक दिवस के अवसर पर जिले के दो शिक्षकों को राज्यपाल ने राज्य स्तरीय शिक्षक अवार्ड से नवाजा है। डीसी अमित खत्री ने बताया कि मालवी के अजमेर सिंह व कमाच खेड़ा के अजमेर सिंह को महामहिम राज्यपाल सत्यदेव नारायण ने राजभवन में सम्मानित किया। कमाच खेड़ा निवासी अजमेर सिंह जेबीटी टीचर है। कमाच खेड़ा के अजमेर सिंह ने गांव की प्राथमिक पाठशाला का भवन खस्ता हाल में था। पाठशाला के बाथरूम, पीने के पानी की व्यवस्था तो बुरी तरह से प्रभावित थी। बच्चों को बाथरूम जाना तक दूभर हो रहा था। अजमेर सिंह ने पीने के पानी की व्यवस्था की। इस काम में उन्होंने गांव के लोगों का भी विश्वास जीता। विद्यालय परिसर को हरा-भरा बनाने के लिए उन्होंने एक पार्क विकसित किया। जिसमें उन्होंने 35 से 40 किस्म के पौधे लगवाए। स्कूल की खस्ताहाल बिल्डिंग को ठीक करवाया। वहीं मालवी गांव में अजमेर शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। मालवी के अजमेर ने माना कि बीस ऐसे बच्चे हैं जो निजी स्कूल से इस प्राथमिक पाठशाला में आए हैं। स्वच्छता, साफ-सफाई के कारण इस पाठशाला को खंड स्तर पर सुंदरीकरण प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त हुआ। मालवी गांव में शिक्षक के पद पर रहते हुए। अजमेर की पाठशाला ने खंड स्तर व जिला स्तर पर पुरस्कार प्राप्त किया था।
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ईश्वर दलाल को भी राज्यपाल ने किया सम्मानित
पेंगा गांव के जेबीटी शिक्षक ईश्वर दलाल को भी राज्यपाल ने सम्मानित किया। ईश्वर दलाल ने विद्यालय व गांव के लोगों में विशेष पहचान बनाई। स्कूल जाने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को एक नई पहचान देने के लिए ईश्वर दलाल ने गले में टाई और आई कार्ड लगवाने की मुहिम शुरू की। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आये। लोगों का मानना है कि उन्हें सहज ही इस बात का पता लगने लगा कि ये बच्चे सरकारी स्कूल की प्राथमिक पाठशाला में पढ़ रहे है। गले में टाई व आई कार्ड किसी प्राइवेट स्कूल जैसी गरिमा को इंगित करता है। स्कूल में पार्क बनवाने स्मार्ट क्लास रूम की व्यवस्था करने, हर रोज डायरी चैक करना, बच्चों को डायरी में होमवर्क देना, अभिभावकों के डायरी पर हस्ताक्षर करवाने जैसे कार्य अभिभावकों को खूब रास आये है। अभिभावक भी यह समझने लगे है कि उनके बच्चे किसी निजी स्कूल के बच्चों से किसी भी मामले में कमतर नहीं है। अपनी 18 साल की अध्यापन सेवा के दौरान ईश्वर दलाल ने पुरानी पुस्तकें रखने के लिए रैक बनवाए है।
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