जिप सीईओ ने चेयरपर्सन को बिना बताए एक मिनट में बैठक की स्थगित
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जिला परिषद चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर होने वाली बैठक किसी को बिना बताए ही रद कर दी गई। प्रशासन ने बैठक को लेकर पूरी तैयारियां कर ली थी। मतदान के लिए पेटियां, पर्दे व पर्चियां सभी की व्यवस्था कर दी गई थी। जिला परिषद चेयरपर्सन पदमा सिंगला बैठक लेने के लिए आने वाले जिला परिषद के सीईओ एवं नगराधीश सत्यवान मान के इंतजार हाल के बाहर खड़ी थी। 10 बजकर 37 मिनट पर सीईओ आए और उनके साथ पदमा सिंगला हाल के अंदर आ गई। एक मिनट कुर्सी पर बैठने के बाद सीईओ उठे और गाड़ी में बैठकर चलने लगे। जब बाहर खड़े पत्रकारों ने पूछा तो उन्होंने केवल इतना ही कहा कि बैठक स्थगित कर दी है। जब कारण पूछा तो उन्होंने बाद में बताने के लिए कहा। जिला परिषद भवन में जितने भी लोग थे, सब देखते ही रह गए। पदमा सिंगला को बाद में पत्रकारों ने बताया कि बैठक स्थगित हो गई है। इसके बाद उन्होंने प्रशासन पर लोकतंत्र की हत्या के आरोप लगाए।
मंगलवार को डीसी द्वारा पदमा सिंगला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए 11 बजे बैठक बुलाई गई थी। इसमें विरोधी खेमे को अपने 18 पार्षदों के साथ आकर चेयरपर्सन पदमा सिंगला के खिलाफ बहुमत साबित करना था। इस निर्धारित समय पर डीआरडीए के सभागार हाल में सभी तैयारियां प्रशासन की तरफ से पूरी थी। सभागार में मतपेटी से लेकर मतदान के लिए होने वाली आवश्यक वस्तुएं निर्धारित समय पर पहुंच गई। जिला परिषद के सीईओ सत्यवान मान के वापस गाड़ी में बैठकर चले जाने के बाद भी जिला परिषद चेयरपर्सन पदमा सिंगला अंदर बैठी रही। पदमा सिंगला विरोधी खेमे के पार्षदों का इंतजार कर रही थी, लेकिन निर्धारित समय पर विरोधी खेमे का एक भी पार्षद हाल में नहीं पहुंचा। जब कर्मचारी अपना सामान वापस उठाने लगे तो पदमा सिंगला ने कारण पूछा। यहां पास खड़े पत्रकारों ने बताया कि बैठक स्थगित हो गई है।
प्रशासन ने षड्यंत्र के तहत बैठक को किया स्थगित
चेयरपर्सन पदमा सिंगला ने कहा कि उनके पास नौ पार्षदों का समर्थन हासिल है। उनके पक्ष में चुनाव आता देख प्रशासन और सरकार के पास बैठक स्थगित करने के अलावा कोई हथकंडा नहीं था। यदि आज बैठक हो जाती तो उसके एक वर्ष तक कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता था। जब प्रशासन ने देखा कि उनकी एक नहीं चलने वाली तो उन्होंने बैठक को रद कर दिया। सिंगला ने कहा कि इसमें केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र तथा उनकी विधायक पत्नी प्रेमलता की दूसरी बार किरकरी हुई है। आज जिस प्रकार से प्रशासन व सरकार ने मिलकर लोकतंत्र की हत्या की है, उससे साफ है कि प्रशासन सरकार के दबाव में किसी भी हद तक जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए आगे कोई तारीख दी तो वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर न्याय मांगेंगी। यदि प्रशासन को बैठक स्थगित करनी थी तो इसकी सूचना दो-चार दिन पहले दी जानी चाहिए। उनको 11 बजे तक बैठक स्थगित करने की कोई अधिकारिक सूचना नहीं मिली जबकि बैठक स्थगित करने से पहले नोटिस लगाना पड़ता है। प्रशासन ने पंचायती राज अधिनियमों का उल्लंघन किया है। जिला प्रशासन और सरकार दोनों की मंशा जिले के विकास की नहीं बल्कि जिले को पिछड़ा करने की है।
यह पार्षद रहे पदमा सिंगला के साथ
वार्ड एक से सुभाष, वार्ड छह से मोनू दनौदा, वार्ड नौ से मुकेश, वार्ड 15 से विनोद सैनी, वार्ड 16 से अमित मलिक, वार्ड 20 से सतीश पहलवान, वार्ड 23 से कोमल और वार्ड 26 से रीना देवी।
अचानक चंडीगढ़ बैठक में जाने के कारण स्थगित की बैठक
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उन्हें अचानक चंडीगढ़ मुख्य सचिव की बैठक में जाना पड़ा। प्रशासन रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण अपनी तैयारियों में लगा हुआ है। इसलिए बैठक को स्थगित करना पड़ा। जल्द ही बैठक के लिए अगली तारीख दी जाएगी।
अमित खत्री, डीसी, जींद