संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़़। विश्व विटिलिगो दिवस के अवसर पर नागरिक अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. सविता ने कहा कि सफेद दाग (विटिलिगो/ल्यूकोडर्मा) को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी न तो छूने से फैलती है और न ही यह कुष्ठ रोग है। समय पर उपचार से इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. सविता ने कहा कि 25 जून को विश्व विटिलिगो दिवस मनाया जाता है जिसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना तथा मरीजों को उचित उपचार और सामाजिक समर्थन उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि सफेद दाग एक गैर-संक्रामक त्वचा रोग है, जिसके कारण मरीज अक्सर मानसिक तनाव का सामना करते हैं। हालांकि इसे लाइलाज समझने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आधुनिक चिकित्सा में इसके प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि विटिलिगो एक ऑटोइम्यून विकार है, जिसमें शरीर की रंग बनाने वाली कोशिकाएं (मेलानोसाइट्स) प्रभावित हो जाती हैं। इसके कारण त्वचा के कुछ हिस्सों में रंग बनना बंद हो जाता है और वहां सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं।
डॉ. सविता के अनुसार, यह बीमारी विश्वभर में लगभग 1 से 2 प्रतिशत लोगों में पाई जाती है, जबकि भारत में इसकी दर 2 से 4 प्रतिशत तक है। यह पुरुषों और महिलाओं दोनों में समान रूप से देखी जाती है।
उन्होंने कहा कि समाज को सफेद दाग से पीड़ित लोगों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए। ऐसे लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कई लोग इस बीमारी को लेकर खानपान संबंधी अनावश्यक परहेज करने लगते हैं, जबकि अधिकांश मामलों में इसकी आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी तरह की भ्रांति या डर के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेकर समय पर उपचार कराएं।