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किसान से ग्राहक तक पहुंचने में डेढ़ गुणा बढ़ जाते हैं सब्जियों के दाम, प्रशासन बेखबर

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vegetables high rate - फोटो : Jhjhar
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किसान के खेत से सब्जियां चलने और सब्जी मंडी में मासाखोर तक पहुंचने तक सब्जियों के रेट पांच प्रतिशत बढ़ जाते हैं। मासाखोर और दुकानदार तक पहुंचते ही उनके रेट डेढ़ से दो गुणा तक बढ़ जाते हैं। सब्जी की बढ़ती कीमतों को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों की तरफ से कोई नियंत्रण नहीं किया जा रहा है। पिछले दिनों प्याज के रेट जब आसमान पर थे, उस समय खाद्य आपूर्ति विभाग की तरफ से केवल दुकानदारों के स्टॉक चेक कर खानापूर्ति ही की गई थी। खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी तीसरे-चौथे दिन सब्जी मंडी जाकर दुकानदारों के पास रखे प्याज का स्टॉक चेक कर वापस अपने कार्यालय आकर निरीक्षण की रिपोर्ट भेज कर अपने फर्ज की इतिश्री कर लेते थे। हालांकि अब सब्जियों के भाव में कुछ हद तक गिरावट आई है। लेकिन किसान से ग्राहक तक पहुंचने में आज भी सब्जियां डेढ़ से दो गुणा रेट पर पहुंच जाती है।
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इस प्रकार बढ़ते हैं सब्जियों के रेट
किसान सब्जी मंडी में जब अपनी सब्जियां लेकर जाता है तो उसकी सब्जी पर आढ़ती के पास पहुंचते ही उस पर पांच प्रतिशत आढ़त का कमीशन बढ़ जाता है। इसके बाद आढ़ती की दुकान से मासाखोर तक मात्र दस मीटर की दूरी पर पहुंचते ही उस सब्जी के रेट डेढ़ गुणा पहुंच जाते हैं। अगर सब्जी मंडी से ग्राहक सब्जी खरीदता है तो वह सब्जी उसे करीब डेढ़ गुणा रेट पर मिल जाएगी। अगर वह एक से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित दुकान पर पहुंच गई और वहां से ग्राहक को सब्जी खरीदनी पड़ती है तो उसके रेट दो गुणा तक पहुंच जाते हैं। दुकानों पर पहुंचते हुए सब्जी अगर मंडी में 20 रुपये किलोग्राम मिलती है तो बाजार में वही सब्जी दुकान से लेने पर 30 से 35 रुपये किलोग्राम में मिल रही हैं। अगर शहर से वह सब्जी गांव की दुकान पर पहुंच गई तो वह दो गुणे रेट में ही मिलेगी।
प्याज और टमाटर के रेट में आई गिरावट
15 दिन पहले तक 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिलने वाले प्याज के रेट और 40 से 50 रुपये किलोग्राम तक मिलने वाले टमाटर के रेट में गिरावट आई है। प्याज और टमाटर के रेट आधे हो गए हैं। फिलहाल प्याज भी नई आने लगी है, वहीं टमाटर भी राजस्थान से आ रहा है। सब्जी मंडी में प्याज 50 रुपये और टमाटर 20 रुपये किलोग्राम के हिसाब से ग्राहकों को मिल रहा है। जबकि अचार वाली हरी मिर्च गुजरात आदि राज्यों से आ रही है। जो 40 से 50 रुपये किलोग्राम तक मिल रही हैं।
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सब्जियों के भाव प्रति किलोग्राम:
सब्जी किसान आढ़ती मासाखोर दुकानदार
आलू 17 रुपये 18 रुपये 20 रुपये 25 रुपये
प्याज 42 रुपये 45 रुपये 50 रुपये 60 रुपये
टमाटर 13 रुपये 14 रुपये 20 रुपये 25 रुपये
फूल गोभी 12 रुपये 13 रुपये 25 रुपये 30 रुपये
पत्ता गोभी 12 रुपये 13 रुपये 30 रुपये 35 रुपये
शिमला मिर्च 35रुपये 37 रुपये 50 रुपये 60 रुपये
मटर 35 रुपये 37 रुपये 50 रुपये 60 रुपये
लहसुन 150 रुपये 160 रुपये 240 रुपये 260 रुपये
हरी मिर्च 25 रुपये 27 रुपये 40 रुपये 45 रुपये
बैंगन 15 रुपये 16 रुपये 25 रुपये 30 रुपये
70 प्रतिशत सब्जियां होती हैं क्षेत्रीय
सब्जी मंडी के आढ़तियों के अनुसार 70 प्रतिशत क्षेत्रिय सब्जियां होती है। जब यहां पर सब्जी का उत्पादन कम होता है, तो अन्य जिलों और राज्यों से भी सब्जियां मंगाई जाती है। लेकिन सीजन के अनुसार 70 प्रतिशत सब्जियां क्षेत्रीय किसानों की होती है। जब क्षेत्र में सब्जी का उत्पादन ज्यादा तो उसके रेट भी कम होने लगते है। क्षेत्र में गाजर, मूली, टमाटर, प्याज, गोभी, बैंगन, मेथी, बथूआ, मटर, खीरा, ककड़ी, मिर्च, घीया तोरी आदि सब्जियों की खेती की जाती है।
मंहगाई की वजह से ग्राहक ज्यादा सब्जियां नहीं खरीदते। जो सब्जियां सस्ती होती है, उन सब्जियों को ग्राहक ज्यादा खरीदते हैं। अगर सब्जी सारी नहीं बिकती तो उसका नुकसान भी झेलना पड़ता है।
-रिंकू, मासाखोर।
किसी भी सब्जी को आढ़ती से लेते है, तो 20 बार सोचना पड़ता है कि यह सब्जी बिक जाएगी या नहीं। उसके बाद सब्जी उसी भाव में बेचनी पड़ती है। जिससे उसकी कीमत भी पूरी हो जाए और शाम तक की मेहनत का मेहनताना भी मिल जाए।
राहुल, मासाखोर।
सब्जी मंडी में सब्जी बेचने के लिए फड़ भी किराए पर ली है। उसके बाद सारा दिन मेहनत भी करते है। इसके अलावा सब्जियां बच जाने पर खराब होने के कारण उसका नुकसान भी भुगतना पड़ता है। उसके अनुसार ही सब्जियां बेचनी पड़ती है।
कृष्ण, मासाखोर।
हरी सब्जियों को अधिक बिक्री होती है। इस उम्मीद में कई बार ज्यादा सब्जी ले लेते है। उस दिन वह नहीं बिक पाती तो वह अगले दिन तक खराब भी हो जाती है। क्योंकि हरी सब्जी के खराब होने की संभावना ज्यादा होती है।
संजय, मासाखोर।
किसान से मासाखोर को सब्जी बेचता है। उस पर आढ़ती का पांच प्रतिशत आढ़त होती है। जिन सब्जियों की क्षेत्र में कमी होती है। उनकी पूर्ति के लिए अन्य राज्यों व क्षेत्र से सब्ज्यिां मंगाते है। अचानक किसी सब्जी के भाव में बढ़ोतरी हो जाती है, तो उस समय अधिकारी स्टॉक जांच करने लिए आते है।
सुनील, प्रधान, आढ़ती एसोशिएसन, सब्जी मंडी झज्जर।
अचानक अगर किसी सब्जी के रेट अगर बढ़ जाते है, तो सरकार के आदेश पर केवल उसके स्टॉक की जांच की जाती है। अगर निर्धारित क्षमता से अधिक पाया जाता है, तो नियम अनुसार उसके खिलाफ कार्रवाई करते है।
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जेपी सैनी, निरीक्षक खाद्य आपूर्ति विभाग, झज्जर।
अगर किसी सब्जी के रेट बढ़ते हैं। तो उस पर कार्रवाई के लिए सरकार के ही आदेश आते हैं। हमारे स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है।
विजय कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी झज्जर।
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