झज्जर। सार्वजनिक स्थलों पर माताओं के लिए अपने शिशुओं को दुग्धपान कराने के लिए काेई व्यवस्था नहीं है। इस कारण दुग्ध पिलाने वाली माताओं को परेशानी होती है।
सार्वजनिक स्थानों पर शिशुओं को दुग्धपान कराने के लिए कई जगह व्यवस्था नहीं है। माताओं को खुले में साड़ी या चुन्नी की ओट में अपने नवजात को दुग्धपान कराना पड़ रहा है। मातृत्व भाव का सम्मान करते हुए हालांकि आमजन ऐसे में अपनी नजरें फेर लेता है लेकिन प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर अनदेखी किए बैठा है। कुछ साल पहले रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, लघु सचिवालय पर शिशु स्तनपान कक्ष ‘वात्सल्य’ बनाने के आदेश दिए गए थे, लेकिन कहीं नहीं बनाए गए।
ट्रेन व बसों में प्रतिदिन हजारों महिलाएं यात्रा करती हैं। इनमें से कई ऐसी महिलाएं होती हैं, जिनके साथ दुधमुंहे शिशु होते हैं। बस स्टैंड व स्टेशन पर कई बार माताओं को अपने बच्चों को दूध पिलाना पड़ता है। ऐसे में कुछ माताएं तो ओट ढूंढकर स्तनपान कराती हैं वहीं कुछ को मजबूरन पब्लिक के बीच में ही दुग्धपान कराना पड़ता है। ऐसे में माताएं असहजता का सामना करती हैं। झज्जर के बस अड्डा, रेलवे स्टेशन और लघु सचिवालय में कहीं भी वात्सल्य कक्ष नहीं बने हुए हैं।
जगह होने के बावजूद नहीं कक्ष
शहर के बस अड्डा, रेलवे स्टेशन और लघु सचिवालय में सभी जगह वात्सल्य कक्ष बनाने के लिए जगह है, लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक कहीं इसे नहीं बनवाया गया है।
बस स्टैंड पर अभी वात्सल्य कक्ष की सुविधा नहीं हैं। यदि मांग आती हैं तो बस स्टैंड पर काफ़ी स्पेस हसि, वहां बना दिया जाएगा।
दीपक कुमार, ट्रैफिक मैनेजर, हरियाणा रोडवेज झज्जर डिपो