फोटो-58: अपने फार्म पर दही को बिलौ करके घी निकालती रेणु सांगवान। स्रोत स्वयं
बहादुरगढ़। सोनीपत के भटगांव स्थित धर्मार्थ गोशाला में हुए समारोह में गोकुल फार्म खरमान की संस्थापक रेणु सांगवान को गोसेवा और देशी नस्ल की गायों के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए सर्वोच्च गोसेवा सम्मान से सम्मानित किया है। यह सम्मान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें प्रदान किया।
सम्मान स्वरूप उन्हें 51 हजार रुपये की राशि और स्मृति चिह्न भी भेंट किया। रेणु सांगवान ने अपने स्वर्गीय पति कृष्ण कुमार के सपने को आगे बढ़ाते हुए एक छोटी डेयरी को आज बड़े और सफल फार्म में बदल दिया है। वर्ष 2016 में पति ने घर में करीब 350 वर्ग गज जगह पर 9 गायों के साथ डेयरी की शुरुआत की थी।
रेणु सांगवान ने बताया कि उस समय बेटा विनय सांगवान दिल्ली में अपने मामा के पास पढ़ाई कर रहा था। वहां गुणवत्तायुक्त दूध और घी की कमी महसूस होने पर और गोमाता के संरक्षण के उद्देश्य से पति ने यह कदम उठाया था। वर्ष 2017 में पति के निधन के बाद परिवार पर कठिन समय आ गया।
रेणु ने हार मानने के बजाय पति के सपने को ही अपना संकल्प बना लिया। उन्होंने धीरे-धीरे गायों की संख्या बढ़ाई और डेयरी को आगे बढ़ाने में पूरा ध्यान लगाया। इस सफर में उनके दोनों बेटों ने भी उनका पूरा साथ दिया। बड़ा बेटा फार्म पर उनका हाथ बंटाता है जबकि छोटा बेटा विनय सांगवान पशु चिकित्सक है।
आज उनका डेयरी फार्म 350 वर्ग गज से बढ़कर करीब 4 एकड़ में फैल चुका है और यहां लगभग 270 देसी गाय हैं। उनके फार्म का दूध करीब 150 रुपये प्रति लीटर और वैदिक पद्धति से तैयार बिलोना घी लगभग 3500 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकता है।
बिलौना देसी घी की मांग विदेशों तक
रेणु सांगवान बताती हैं कि उनके फार्म में तैयार बिलौना देसी घी की मांग विदेशों तक पहुंच चुकी है। वे अमेरिका, यूएई, दुबई, जर्मनी और यूके सहित करीब 13 देशों में देसी घी का निर्यात कर रही हैं। आज उनके डेयरी व्यवसाय का सालाना टर्नओवर करीब 3 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
फोटो-58: अपने फार्म पर दही को बिलौ करके घी निकालती रेणु सांगवान। स्रोत स्वयं