फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शादी के लिए आने वाला था घर, अब तिरंगे में लिपटकर पहुंचेगा

Tue, 22 Nov 2016 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ झज्जर / बहादुरगढ़
विज्ञापन
accident - फोटो : Bureau
विज्ञापन
कब आओगे अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं तेरी शादी को जल्दी से छुट्टी लेकर घर आ जाओ। हां मां मैं जल्द ही आऊंगा अभी कमांडो कोर्स चल रहा है। कुछ ही दिनों में यह समाप्त हो जाएगा। इसके खत्म होते ही तीन चार दिन की छुट्टी लेकर आऊंगा इसके बाद फरवरी में शादी के लिए महीने भर की छुट्टी ले लूंगा। ये बातें अक्सर ही लेफ्टिनेंट संदीप व उसकी मां राज्जो के बीच फोन पर होती रहती थी। लेकिन किसी को इस बात की क्या खबर थी कि शादी की तैयारी कर रहे मां-बाप के पास संदीप का तिरंगे में लिपटा शव आएगा वह नहीं।
विज्ञापन

कानपुर में शनिवार को भोर में हुई ट्रेन दुर्घटना में गांव सिलानी निवासी लेफ्टिनेंट संदीप की मौत हो गई। आज पूरे सैन्य सम्मान के उसका अंतिम संस्कार होगा। आर्मी में लेफ्टिनेंट संदीप (24 वर्ष) पुत्र धर्मसिंह निवासी गांव सिलानी की रेल हादसे में मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि शनिवार को लेफ्टिनेंट संदीप कमांडो का कोर्स करके ट्रेन से अन्य साथियों के साथ वापस लौट रहा था तभी यह हादसा हुआ। मौत की खबर आते ही घर में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। हालांकि अभी लेफ्टिनेंट का शव उनके पैत्रृक गांव सिलानी नहीं पहुंचा है। बताया जा रहा है कि कानपुर के पास हुए रेल हादसे के बाद सैन्य जवानों के शवों को आर्मी के जवान उठाकर ले गए, अब सैन्य कार्रवाई पूरी होने के बाद आज संदीप के शव को दाह संस्कार के लिए लाया जाएगा।

घर के काफी सदस्य फौज में भर्ती होकर कर चुके हैं कर्तव्य पालन
लेफ्टिनेंट संदीप के परिवार के काफी सदस्य फौज में नौकरी कर चुके हैं और कुछ अब भी फौज में ही विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। संदीप के 84 वर्षीय दादा जगदे कैप्टन के पद से रिटायरमेंट हैं। उनके पिता धर्मसिंह फौज के हवलदार पद से पेंशन आकर अब दिल्ली पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत हैं, संदीप के ताऊ जयपाल और चाचा विजयपाल भी मिलिट्री से ही रिटायरमेंट हुए हैं। इनके अलावा भी कई अन्य परिवार के सदस्य फौज के बड़े बड़े पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन सबसे प्रेरित होकर ही संदीप ने मिलिट्री ज्वाइन की थी। वे करीब 3 साल पहले ही मिलिट्री स्कूल से बारहवीं करके एनडीए का पेपर पास करते हुए लेफ्टिनेंट के पद पर कार्यरत हुए।
विज्ञापन


बड़ा ही बहादुर व मिलनसार था संदीप
घर के गमगीन माहौल में परिजनों के साथ साथ उनके गांव वालों को उनके बचपन से जुड़े किस्सों के बारे में आपस में बात करते देखा गया। गली में हुक्का पर बैठे बुजुर्गों ने बताया कि संदीप को हमेशा याद किया जाएगा। संदीप बचपन से ही बहादुर और सबके साथ मेल मिलाप के साथ रहने वाला लड़का था।

नहीं सूख रहे मेजर की मां की आंखों से आंसू
बेटे की मौत की खबर सुनते ही शहीद की मां राज्जो की आंखों से आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे हैं। बार बार बेटे की याद में बेसुध हो कर गिर रही माँ उसकी बचपन की यादों को वो भुला नही ंपा रही और फरवरी माह में होने जा रह संदीप की शादी के सुखद लम्हों से भी किसी का परिचय नहीं हो पाया। जिसके कारण संदीप के पैतृक गांव सिलानी में भी माहौल काफी गमगीन बना हुआ है। संदीप के परिजनों का कहना था कि अमित हमेशा से पढ़ाई में अच्छा था और देश सेवा के लिए सेना में जाना चाहता था।

दो भाईयों में बड़ा था लेफ्टिनेंट संदीप
लेफ्टिनेंट संदीप दो भाईयों में बड़ा था। करीब तीन साल पहले ही उसने फौज में नौकरी ज्वाइन की थी। उसका छोटा भाई प्रदीप अभी बीएससी की पढ़ाई कर रहा है। संदीप के ताऊ का कहना था कि संदीप और प्रदीप दोनों की लड़के बेहद शरीफ और अपने काम के प्रति लगाव रखने वाले हैं। उन्होंने बताया कि संदीप का छोटा भाई प्रदीप भी परिवार से प्रेरित होकर हमेशा ही फोज में नौकरी करने की बात करता है।  लेफ्टिनेंट संदीप की बचपन की यादें उनसे भुलाई नहीं जा रही। आज भी वह अपने बेटे के  शादी समारोह में शिरकत हुए संदीप की फोट देख कर संदीप की यादों में खोया हुआ है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें