शहर में पेयजल आपूर्ति करने वाली बहादुरगढ़ माइनर की सफाई व उसको पक्की बनाने के काम के चलते शहर की कई कॉलोनियों में पेयजल संकट गहराया हुआ है।
जनस्वास्थ्य विभाग के स्टोरेज टैंक लगभग खाली हो चुके हैं ऐसे में अगले कुछ दिन पानी की कमी का संकट रह सकता है।
करीब अढ़ाई दशक पहले बनी बहादुरगढ़ माइनर की हालत कुछ जगह से खस्ताहाल थी। उसमें काफी बड़े-बड़े कटाव हो गए थे। कई बार तो पानी के दबाव के चलते माइनर के पुश्ते टूट जाते थे।
इससे आसपास के क्षेत्रों में व्यर्थ ही पानी भर जाता था। शहरवासियों को पेयजल का संकट झेलना पड़ता था। इसी को ध्यान रखते हुए सिंचाई विभाग पिछले कई दिनों से माइनर के मेंटेनेंस वर्क पर जोर दे रहा है।
शहर की सीमा में कार्य जोर-शोर से चल रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग के वाटर टैंकों के नजदीक तो इसको पक्का करने में मजदूर जुटे हुए हैं।
माइनर में सफाई कार्य व निर्माण कार्य को गति देने के लिए इसमें पानी की सप्लाई कई दिन से बाधित है। इस कारण जनस्वास्थ्य विभाग के जल घर के स्टोरेज टैंकों में भी पानी की मात्रा की स्थिति बहुत खराब है।
दो टैंक तो पूरी तरह से खाली हो गए हैं जबकि एक टैंक में बहुत कम पानी बचा है। उसको भरने के लिए पानी आ रहा हैं। शुक्रवार से तो बहादुरगढ़ में पेयजल आपूर्ति का संकट गहरा गया है।
गड़बड़ाई पेयजल आपूर्ति को नियमित होने में सप्ताहभर का समय लग सकता है। माइनर मेंटेनेंस वर्क में लगी मशीन एक जगह पर फंस गई।
इसको निकालने के प्रयास में यहां की दीवार कमजोर हो गई। इसलिए कहीं से टूटने के डर से इसमें पानी कम छोड़ा जा रहा है।
गांव सांखोल के नजदीक माइनर का किसी ने अचानक एस्केप खोल दिया था जिससे काफी पानी की बरबादी हुई थी। इस कारण भी जलघर में पेयजल की कमी पड़ गई।
रविवार को शहर के कई हिस्सों में पेयजल की आपूर्ति बाधित रही। जटवाड़ा के कई हिस्सों में थोड़ा-थोड़ा पानी दिया जा रहा है।
सफाई में दिक्कत
जनस्वास्थ्य विभाग के वाटर वर्क्स को पानी सप्लाई करने वाली माइनर के करीब एक किलोमीटर लंबे भूमिगत हिस्से की सफाई चुनौती बन गई है।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसमें काफी मिट्टी (गाद) भरी पड़ी है इसके कारण उनके स्टोरेज टैंकों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा।
जब भी भूमिगत हिस्से में सफाई होगी तो उस दौरान पेयजल सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। इसलिए यहां सफाई करने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी है।
मिल रहा कम पानी
पिछले दो दिन से पेयजल सप्लाई में कुछ दिक्कत हुई है लेकिन विभाग के अधिकारी माइनर के हैड तक दौरा कर चुके हैं। वहां से पानी कम सप्लाई किया जा रहा है। एस्केप का लेवल कई इंच तक कम है।
इसी के चलते जीडब्ल्यूएससी से बहादुरगढ़ में पानी कम आ रहा है। माइनर के खुले हिस्से की सफाई का फायदा इसलिए नहीं मिल रहा कि आखिरी प्वाइंट पर कई फुट तक सिल्ट फंसी है।
इसलिए एक तो माइनर में पूरा पानी छोड़ा जाना चाहिए और दूसरा आखिरी छोर तक इसकी अच्छी सफाई हो, तभी पूरा पानी मिलेगा। उसके बाद शहर के सभी हिस्सों में पर्याप्त पेयजल सप्लाई हो सकेगी।
-एसके जैन, कार्यकारी अभियंता, जलापूर्ति विभाग, बहादुरगढ़
अधिकारी करेंगे निगरानी
पांच दिन में वाटर वर्क्स के टैंक पूरे भरने का प्रयास है। इसमें किसी तरह की दिक्कत से निपटने के लिए एसडीओ व जेई स्पेशल निगरानी कर रहे हैं। माइनर कैपेसिटी को ध्यान रखते हुए उसी हिसाब से पानी छोड़ा जा रहा है।
सफाई कार्य में एक दिन मशीन फंसने तो एक दिन चोरी से एस्केप खोल दिए जाने से कुछ दिक्कत जरूरत हुई लेकिन आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा। एक बार पानी बंद होने बाद अंतिम छोर तक पहुंचने में कुछ वक्त लगता है।
शनिवार शाम तक स्टोरेज टैंक में पानी पहुंचना शुरू हुआ था लेकिन अब सप्लाई नियमित हो रही है। विभाग का प्रयास है कि अगले पांच दिनों में वाटर टैंक फुल हो जाएंगे। इसके लिए कामकाज पर पूरा जोर दिया हुआ है।
- मंजीत हुड्डा, कार्यकारी अभियंता, दिल्ली डिविजन, सिंचाई विभाग
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---फोटो 12 : सफाई कार्य के लिए सुखाए गए हैं दो प्रमुख टैंक।
---फोटो 13 : तीसरे वाटर टैंक में आधे बहुत कम है पानी।
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