बादली। सोंधी गांव स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों को टीबी के लक्षण, बचाव व उपचार के बारे में जानकारी दी।
स्वास्थ्यकर्मी मुकेश कुमार ने बताया कि टीबी को तपेदिक भी कहते हैं जो कि विभिन्न प्रकार के जीवाणुओं से होती है और फेफड़ों को प्रभावित करती है। किसी बीमार व्यक्ति के जगह-जगह थूकने, खांसने या बोलते समय ज्यादा नजदीक होने पर जीवाणुओं से फैलती है। उन्होंने बताया कि टीबी रोगी को बात करते समय या किसी के पास बैठने पर मुंह पर कपड़ा रखना चाहिए। टीबी के लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी टीबी सेंटर या नागरिक अस्पताल में बलगम की जांच करवानी चाहिए।
इसका उपचार करवाना चाहिए, ताकि समय रहते इस रोग को फैलने से रोका जा सके। लोगों को टीबी से बचाव व लक्षण के बारे में जागरूक करते हुए बताया कि दो सप्ताह से खांसी होना, खांसी के साथ बलगम या खून आना, रात में बुखार व पसीना आना, शरीर में दर्द रहना टीबी के लक्षण है। अगर किसी को टीबी है तो वह सरकारी अस्पताल से मुफ्त इलाज करवा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार टीबी मरीज के खाते में एक हजार रुपये पौष्टिक आहार के लिए देती है। इस अवसर पर स्वास्थ्य कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।