नरवाना। प्रशासन की सख्ती के बाद भी क्षेत्र के खरडवाल गांव निवासी हवा सिंह पर पराली जलाने का केस दर्ज हुआ है। इसके साथ ही किसान पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अब इस किसान के रिकॉर्ड में रेड एंट्री तक दर्ज होगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार पराली जलाने पर नरवाना क्षेत्र के गांव दनौदा, खरडवाल और उचाना खुर्द में अब तक तीन किसानों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें दनौदा और उचाना खुर्द के एक-एक किसान पर एफआईआर के साथ 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि हरसेक एप के माध्यम से खेतों में पराली जलाने की लोकेशन विभाग तक पहुंच जाती है। इसके बाद ग्राम स्तरीय कमेटी, इसमें राजस्व विभाग का पटवारी, कृषि विभाग का कर्मचारी और पंचायत सचिव शामिल होते हैं। मौके पर जाकर सत्यापन करती है। जिस किसान के खेत में पराली जलाना पाया जाता है उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाती है।
कृषि विभाग का कहना है कि सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद गंभीर है और पराली जलाने जैसी लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी किसान इस नियम का उल्लंघन करेगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वह पराली को जलाने के बजाय वैकल्पिक उपाय अपनाएं।
किसान कृषि यंत्रों की मदद से अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर खाद के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा पराली की गांठें बनवाकर सरकार की प्रोत्साहन राशि का लाभ लिया जा सकता है। वहीं, 1121 किस्म के धान की फूस को पशुओं के चारे के रूप में भी उपयोग में लाया जा सकता है। कृषि अधिकारियों ने कहा कि किसानों का सहयोग ही स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित होगा।
पराली जलाने पर लागू कानून और दंड
कृषि अधिकारी डॉ वीरेंद्र बुरा ने बताया कि अब तक जलने वाले किसानों पर नरवाना उपमंडल में 20000 रुपये व उचाना में 10000 रुपये प्रणाली जुर्माना लगाया जा चुका है। उन्होंने कहा जो किसान दो एकड़ में धान के पूछ में आग लगाता है, तो उसे पर 5000 रुपये दो से पांच एकड़ में आग लगने पर 10000 व पांच एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में आग लगाने पर 30000 का जुर्माना किया जाता है। वही उसे किसान की रेड एंट्री की जाती है। इसमें उसका पंजीकरण बंद हो जाता है। वह दो साल तक अपनी फसल नहीं बेच सकता और सरकार द्वारा मिल रही योजना का लाभ भी नहीं उठा पाता।
वर्जन
कृषि विभाग की ओर से ऐसे किसानों पर लगातार नजर रखी जा रही है जो अपने खेतों में पड़े पराली में आग लग रहे हैं जो किसान अपनी पराली में आग लगाता है और हरसेक लोकेशन में आने पर उसकी ग्राम स्तरीय कमेटी द्वारा पहचान की जाती है और उसे पर जुर्माना लगाया जाता है। –डॉ सुरेंद्र मोर, खंड कृषि अधिकारी नरवाना